मुरादाबाद में 13 अगस्त 1980 की सुबह ईद की नमाज के बाद दुआ से पहले ही दंगा भड़क गया था। नमाज खत्म होने के बाद शहर इमाम दुआ की तैयारी कर रहे थे, तभी शोरशराबा के साथ हिंसा फैलनी शुरू हो गई थी। दंगे के सवा घंटे के भीतर ही पूरा शहर कर्फ्यू के हवाले हो गया था। गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच लाशें गिरने लगी थीं।
दंगे के गुनहगार शहर के फैजगंज निवासी डॉ. शमीम अहमद डॉक्टर से विधायक बने थे। सियासत में आने से पहले वह जिला अस्पताल में बतौर डॉक्टर अपनी सेवाएं थी। वर्ष 1989 में नगर सीट से विधायक बने थे। यह चुनाव उन्होंने जनता दल के टिकट पर लड़ा था।
बाद में उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा देते हुए राष्ट्रीय एकीकरण परिषद का उपाध्यक्ष बनाया गया था। डेढ़ साल बाद दोबारा चुनाव हुआ तो उन्हें टिकट नहीं मिला था। डॉ. शमीम ने 1985 में मुस्लिम लीग के टिकट पर गाजियाबाद से लोकसभा का भी चुनाव लड़ा था। वर्ष 1999 में डॉ. शमीम का निधन हो गया था।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक ईद की नमाज खत्म होने के बाद दुआ से पहले मुस्लिम लीग के शिविर की बायीं ओर कुछ शोरगुल शुरू हो गया था। डीएम और एसएसपी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए थे। अधिकारियों ने किसी तरह लोगों को समझाबुझाकर शांत कराया।
वहां कुछ फोर्स छोड़कर अधिकारी अपने कैंप की ओर लौटने लगे थे। अधिकारी अभी कुछ दूर चले ही थे, तभी पीछे दंगा भड़क उठा। दूसरे समुदाय के लोगों और उनके घरों पर पथराव शुरू हो गया।
मुरादाबाद में 13 अगस्त 1980 में दंगा हुआ था। 43 साल बाद अगस्त माह में सदन में जांच रिपोर्ट पेश की गई है। इन 43 सालों में कांग्रेस, सपा, बसपा और भाजपा की सरकारें बनीं। 15 मुख्यमंत्री भी बदले जा चुके हैं लेकिन किसी भी सरकार ने जांच रिपोर्ट पेश नहीं की थी।