मंडल में ट्रेनों के देरी से चलने के कारण मुख्यालय तक हड़कंप मचा हुआ है। उत्तर रेलवे के पांचों मंडलों में मुरादाबाद ट्रेनों को टाइम से चलाने में सबसे पीछे है। गाड़ियों को समय से चलाने में आ रही दिक्कतों के समाधान के लिए गुरुवार को चीफ पैसेंजर ट्रैफिक मैनेजर ने डीआरएम के साथ बैठक की।
इसमें ट्रेनों को समय से चलाने के मुद्दे पर चर्चा हुई। इसमें निकलकर आया कि मंडल के जर्जर हो चुके ट्रैकों पर गाड़ियों को दौड़ाना खतरे से खाली नहीं है। ट्रैक मरम्मत की जाती है तो ट्रेन लेट होती हैं।
दिल्ली से आए सीपीटीएम संजय जैन ने डीआरएम से मुलाकात की। उनका मुख्य मुद्दा गाड़ियों का समय से चलाने का था। डीआरएम ने उनके साथ गाड़ियों के देरी से चलने के कारणों पर चर्चा की।
मुख्य रूप से ट्रेनों के लेट होने के कारण गिनाए गए तो सबसे प्रमुख मुद्दों पुराना हो चुका ट्रैक निकला। मुरादाबाद मंडल में 2700 किमी के ट्रैक में कई स्थान ऐसे हैं जहां से गाड़ियों को कासन लगाकर गुजारा जाता है। कुल मिलाकर करीब 100 किमी का एरिया ऐसा है जहां गाड़ियां रफ्तार नहीं पकड़ पाती है। इन्हें सही कराने के लिए ब्लाक की जरूरत पड़ती है। ब्लाक लिए जाने पर ट्रेन लेट होती हैं। दोनों के बीच ट्रैक मरम्मत सहित अन्य कार्यों के लिए होने वाले ब्लाक की प्राथमिकता निर्धारित करने पर समझौता हुआ।
मंडल को 90 फीसदी पंक्चुएलिटी का टारगेट
मुरादाबाद। मंडल में ट्रेेनों को टाइम से चलाने का औसत बहुत खराब चल रहा है। ट्रेनों की पंक्चुएलिटी (प्रतिदिन गुजरने वाली ट्रेनों में टाइम पर चलने वाली गाड़ियां) 75 फीसदी के आसपास है। मुख्यालय ने मंडल को ट्रेनों को चलाने के लिए 90 प्रतिशत का टारगेट दिया है। लेकिन इस टारगेट तक पहुंचने में मंडल के अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं। हालांकि पूरा दम लगाने के बाद बुधवार को पंक्चुएलिटी 90 फीसदी तक पहुंची।
हर दिन लेट हो रही गाड़ियां
मंडल में प्रतिदिन लेट होने वाली गाड़ियों का आंकड़ा बेहद खराब है। चेनपुलिंग से प्रतिदिन औसतन तीन ट्रेन, सिग्नल फेल होने से तीन ट्रेन लेट होती है। जबकि सबसे अधिक परेशानी गेट बंद नहीं हो पाने के कारण गाड़ियां लेट हो जाती हैं। अधिक भीड़ वाले फाटकों पर ट्रेन आने की घोषणा होने के बावजूद लोग लगातार गेट पार करते हैं तो दुर्घटना से बचने के लिए ट्रेनों को रोकना पड़ जाता है। एडीआरएम संजीव मिश्रा ने बताया कि पिछले दो महीने में गेट बंद नहीं हो पाने के कारण 221 गाड़ियों लेट हो गईं। जबकि तीन से चार ट्रेन ब्लाक लिए जाने के कारण होती है। इस प्रकार से प्रतिदिन 12 से 13 ट्रेन देरी से चलती हैं जो मंडल स्थिति खराब करता है।