कागजों में मृत दिखाकर जीवित बुजुर्ग महिला की पेंशन रोकने का मामला सामने आया है। महिला की पेंशन लगभग दो साल से रुकी है। महिला ने जिलाधिकारी के सामने उपस्थित होकर कहा, हुजूर मैं जिंदा हूं। कागजों में मुझे मृत दिखाकर मेरी पेंशन रोक दी गई। जिलाधिकारी के आदेश पर एसडीएम मिलक ने बीडीओ से तीन दिन में रिपोर्ट तलब की है।
तहसील क्षेत्र के जनूनागर गांव निवासी चंद्रवती ने गुरुवार को जिलाधिकारी से गुहार लगाई कि मार्च 2019 से उसके बैंक खाते में वृद्धावस्था पेंशन नहीं आ रही है। बैंक से जानकारी मिली कि सत्यापन में उसे मृत दिखा दिया गया है। इस वजह से उसकी पेंशन बंद हो गई है। उसने जिलाधिकारी से कहा कि वह जिंदा है। पेंशन न मिलने से वह परेशान है। डीएम आन्जनेय कुमार सिंह ने मामले की जांच उपजिलाधिकारी मनोज कुमार सागर से कराई। एसडीएम की जांच में पेंशनभोगी महिला की शिकायत सही मिली।
शुक्रवार को उप जिलाधिकारी ने बताया कि जांच पूरी कर ली गई है। महिला जिंदा है और उसको पेंशन नहीं मिल पा रही है। इसे लेकर खंड विकास अधिकारी से तीन दिन में विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। खंड विकास अधिकारी से संबधित महिला की पेंशन रोके जाने को लेकर पूरी रिपोर्ट तलब की है जिसमें यह स्पष्ट करने को कहा है कि पेंशनभोगी महिला को सत्यापन में मरा दर्शाने से पेंशन रोकी गई है या अन्य कोई आधार है?। किस स्तर पर लापरवाही हुई है।
किसी जिंदा व्यक्ति को कागजों में मृत दिखा देना गंभीर लापरवाही है। इसकी जांच कराई जा रही है कि महिला का सत्यापन किसने किया था। लापरवाही बरतने वाले के खिलाफ गंभीर कार्रवाई होगी। महिला की पेंशन बहाल करने के आदेश दिए गए हैं।
- आन्जनेय कुमार सिंह, जिलाधिकारी
अन्य मामले में लेखपाल पर गिर चुकी है गाज, पेंशन नहीं हुई बहाल
कुछ दिन पहले भी मिलक की एक महिला पुनिया ने जिलाधिकारी के सामने पेश होकर अपने जीवित होने का प्रमाण दिया था। पुनिया को भी कागजों में मृत दिखाकर उसकी विधवा पेंशन रोक दी गई थी। जिलाधिकारी के आदेश पर बुजुर्ग महिला को सत्यापन में मृत दिखाने के आरोपी तत्कालीन लेखपाल को निलंबित कर दिया गया था। एक पखवाड़ा गुजर चुका है, लेकिन बुजुर्ग महिला की रुकी पेंशन अभी बहाल नहीं हो पाई है। महिला का कहना है कि सप्ताह भर पहले बैंक गई थी, लेकिन खाते में उसकी पेंशन नहीं आई है।