मुरादाबाद। मंडल मुख्यालय होने के बावजूद मुरादाबाद जिला सरकारी अस्पतालों में प्रसव के मामले में सबसे कमजोर साबित हो रहा है। यूनिसेफ की मंडलीय सर्वे रिपोर्ट ने जिले की सरकारी व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने के मामले में मुरादाबाद मंडल के सबसे निचले पायदान पर पहुंच गया है।
रिपोर्ट के अनुसार मुरादाबाद में सिर्फ 18.71 प्रतिशत प्रसव ही सरकारी अस्पतालों में हुए। यानी हर 100 में से 81 से ज्यादा महिलाएं सरकारी अस्पतालों से दूर रहीं। यह स्थिति तब है जब जिले में महिला अस्पताल, आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और करोड़ों रुपये की योजनाएं संचालित हैं। मुरादाबाद से बेहतर स्थिति संभल, रामपुर और अमरोहा की रही।
संभल में सरकारी संस्थानों में 45.03 प्रतिशत प्रसव हुए, जो मुरादाबाद के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा हैं। रामपुर में 28.65 और अमरोहा में 25.92 प्रतिशत प्रसव सरकारी अस्पतालों में हुए। संसाधनों के लिहाज से पीछे माने जाने वाले बिजनौर ने भी मुरादाबाद को टक्कर दी। इसका एक कारण यह भी है कि मुरादाबाद के कांठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात नहीं है। ठाकुरद्वारा में डॉक्टरों की कमी है। इसके कारण भी सरकारी अस्पतालों में प्रसव का आंकड़ा गिर रहा है।
कुल संस्थागत प्रसव के आंकड़े भी दिखा रहे आईना
सरकारी व निजी दोनों अस्पतालों में होने वाले सभी प्रसव की बात करें तो भी मुरादाबाद मंडल में सबसे कमजोर साबित हुआ है। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक की डिलीवरी रिपोर्ट में मुरादाबाद का संस्थागत प्रसव का औसत 79.24 प्रतिशत पर अटक गया। दूसरी ओर संभल ने 92.87 प्रतिशत संस्थागत प्रसव के साथ मंडल में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। लेकिन यहां भी सात प्रतिशत प्रसव घर पर होना स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच पर सवाल खड़ा करता है। बिजनौर में 85.08 प्रसव अस्पतालों में हुए। अमरोहा में 83.67 प्रतिशत और रामपुर में 82.48 प्रतिशत महिलाएं डिलीवरी कराने के लिए सरकारी या निजी अस्पताल पहुंचीं।
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सरकारी अस्पतालों में प्रसव
संभल : 45.03%
अमरोहा : 25.92%
रामपुर : 28.65% बिजनौर : 19.77%
मुरादाबाद : 18.71%
मंडल का कुल आंकड़ा (अप्रैल 2025 – मार्च 2026)
अनुमानित प्रसव: 4,05,230
कुल संस्थागत प्रसव: 84.24%
सरकारी संस्थानों में: 26.10%
निजी संस्थानों में: 56.61%
घर पर प्रसव: 1.53%
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वर्जन
जहां-जहां संस्थागत प्रसव की रिपोर्टिंग कम है, वहां निजी अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि हर प्रसव की सूचना स्वास्थ्य विभाग को दें, जिससे अधिक सटीक जानकारी मिल सके कि कितने लोगों ने अस्पताल में डिलीवरी कराई है।
- डॉ. आशु अग्रवाल, एडी हेल्थ