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UP: मम्मी... आप चिंता मत कीजिए, मैं अफसर बनकर पूरा करूंगी पापा का सपना; कोर्ट का फैसला सुन भावुक हुए परिजन

Wed, 31 Jul 2024 02:21 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद

सार

कटघर के गोविंद नगर निवासी आनंद पाल सिंह के बेटे पुष्पेंद्र यादव की 21 सितंबर 2015 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अदालत ने सोमवार को इस मामले में महिला कल्याण विभाग के दो सेवानिवृत्त बाबू समेत नौ दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। पुष्पेंद्र के परिवार ने इंसाफ के लिए लंबा संघर्ष किया है। 
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मृतक पुष्पेंद्र की पत्नी, बेटी और मां - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नौ साल पहले शहर के फव्वारा चौराहे पर गोली मारकर मौत के घाट उतारे गए सिविल सर्विसेस की तैयारी कर रहे पुष्पेंद्र यादव की बेटी तृषिता 10 साल की हो गई। मम्मी को उदास या रोता देख कर तृषिता उसे समझाने लगती है। वह मां की आंखों से आंसू पोछते हुए बोलती है मम्मी आप चिंता मत कीजिए। पापा अफसर बनना चाहते थे लेकिन दुश्मनों ने ऐसा नहीं होने दिया। मैं अफसर बनकर अपने पापा का सपना पूरा करूंगी।
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कटघर के गोविंद नगर निवासी आनंद पाल सिंह के बेटे पुष्पेंद्र यादव की 21 सितंबर 2015 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अदालत ने सोमवार को इस मामले में महिला कल्याण विभाग के दो सेवानिवृत्त बाबू समेत नौ दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। पुष्पेंद्र के परिवार ने इंसाफ के लिए लंबा संघर्ष किया है। 

पुष्पेंद्र की मां ने बताया कि जिस वक्त पुष्पेंद्र की हत्या की गई थी तब उसकी बेटी तृषिता एक साल 4 माह की थी अब दस साल की हो गई है। वह पांचवीं कक्षा में पढ़ रही है। पुष्पेंद्र की पत्नी दीक्षा उर्फ गुड्डी यादव ने बताया कि शुरुआत में बेटी बार बार अपने पापा के बारे में पूछती थी वो बोलती कि दूसरे बच्चों के पापा उन्हें स्कूल छोड़ने जाते हैं मेरे पापा कहां हैं। 
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उस वक्त बेटी को तरह तरह की कहानियां सुनाकर समझा दिया जाता था लेकिन अब वह समझदार हो चुकी है। दीक्षा उर्फ गुड्डी अपने पति की याद में उदास होती है या रोती है तो बेटी समझाने लगती है। मम्मी आप चिंता मत दीजिए मैं अफसर बनकर पापा का सपना पूरा करूंगी।

उस मनहूस दिन को नहीं भूल पाऊंगी
21 सितंबर 2015 की सुबह सात बजे का वक्त था। मेरी बेटी ने चाय बनाई थी। पुष्पेंद्र कोचिंग जाने के लिए तैयार हो रहा था। बेटी ने चाय का कप पुष्पेंद्र को दिया लेकिन कप नीचे गिर गया था। उस वक्त से ही मेरे मन में बेचैनी होने लगी थी। तब बहू पोती को लेकर अपने मायके गई थी।

मेरा बेटा उस दिन भूखा ही चला गया था। मैं गेट पर खड़ी होकर बेटे को देखती रही। बेटे के घर लौटने का इंतजार कर रही थी लेकिन बेटा तो नहीं आया उसकी हत्या की सुनाई मिली थी। उस मनहूस दिन का एक एक पल मुझे आज भी याद है।

पूरे परिवार को खत्म करने की मिली थीं धमकियां
पुष्पेंद्र के पिता आनंद पाल सिंह ने बताया कि बेटे ने घटना से एक साल पहले ही महिला कल्याण विभाग से नौकरी छोड़ दी थी लेकिन चुन्नी लाल और मुकुट लाल को शक था कि पुष्पेंद्र यादव ने चार साल तक विभाग में कंप्यूटर आपरेटर के पद संविदा पर पर नौकरी की थी। उसे घोटाले की जानकारी है। इस लिए दोनों ने तीन लाख रुपये की सुपारी देकर बेटे की हत्या कर दी थी। इस मामले में नौ आरोपी जेल भेजे गए थे।

आरोपियों ने समझौता करने के लिए चार करोड़ रुपये का लालच दिया था लेकिन मैंने और मेरे परिवार ने ठान लिया था कि दोषियों को सजा दिलाने तक लड़ते रहेंगे इसके बाद आरोपियों ने पूरे परिवार को खत्म करने की धमकियां दी थीं।
 

कंप्यूटर ऑपरेटर हत्याकांड : दो सेवानिवृत्त लिपिक समेत नौ दोषियों को आजीवन कारावास
नौ साल पहले फव्वारा चौक पर कंप्यूटर ऑपरेटर पुष्पेंद्र की गोली मारकर हत्या करने के मामले में अदालत ने दोषी करार दिए गए दो सरकारी विभाग के लिपिकों समेत नौ आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक पर चार लाख तीस हजार रुपये अर्थदंड लगाया। साथ ही दो दोषियों पर तीस हजार रुपये प्रथक रूप से जुर्माने से भी दंडित किया है।

 

महिला कल्याण विभाग में संविदा पर कार्य करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटर पुष्पेंद्र की हत्या मात्र शक के आधार पर कर दी गई थी। उसके पिता अनंग पाल उर्फ आनंद पाल पुत्र गिरधारी निवासी गोविंद नगर ने 21 सितंबर 2015 को थाना सिविल लाइन में मुकदमा दर्ज कराया था। बताया कि उसका बेटा पुष्पेंद्र घर से कोचिंग के लिए निकला था। 

 

कोचिंग से लौटते समय तीन अज्ञात लड़कों ने उसके बेटे को गोली मार दी। उसका बेटा महिला कल्याण विभाग में संविदा पर कंप्यूटर ऑपरेटर का काम करता था। यहां लिपिक चुन्नी लाल और मुकुट लाल भी काम करते थे। दो माह पहले किसी महिपाल नामक व्यक्ति ने ज़न सूचना अधिकार के तहत विभाग में हो रही धांधली के विषय में सूचना मांगी तो दोनों लिपिक उसके बेटे पर शक करने लगे। उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई थी। दोनों लिपिकों को शक था कि पुष्पेंद्र ने ही महिपाल से सूचना मंगवाई है। इसी बात की रंजिश दोनों लिपिक पुष्पेंद्र से रखने लगे।

 

घटना के समय पुष्पेंद्र अपने साले विजय के साथ पीली कोठी की ओर से आ रहा था। हम दोनों के सामने ही तीनों अज्ञात बदमाशों ने गोली मारी और अपनी मोटरसाइकिल से भाग गए। उन्होंने बदमाशों का पीछा किया लेकिन वे हाथ नहीं आए। मौके पर मौजूद पुलिस ने पुष्पेंद्र को जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस मामले थाना पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू की। जिसमें सबसे पहले गोली मारने वाले आरोपी शहजाद और शादाब को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। 

 

पुलिस के सामने आरोपियों ने पूरा घटनाक्रम बता दिया और उनकी निशानदेही पर पुलिस ने हथियार भी बरामद किया। आरोपियों ने यह भी बताया कि महिला कल्याण विभाग में कार्यरत चुन्नी लाल निवासी राम गंगा विहार साईं मंदिर के पास और मुकुट लाल निवासी चंदौसी ने ही हत्या के लिए सुपारी दी थी। इस घटना में शामिल दोनों लिपिकों के नाम के साथ-साथ जमील उर्फ खलील, जौहर, सलमान, आसिफ़, शहजाद, शादाब और फिरासत निवासी पुराना आरटीओ चक्कर की मिलक का नाम उजागर किया। मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संख्या तीन सरोज कुमार यादव की अदालत में की गई। 

 
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अतिरिक्त जिला शासकीय अधिवक्ता मनीष भटनागर ने बताया कि मुकदमे में सोलह गवाह अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए। जिसमें न केवल वादी अनंग पाल बल्कि मृतक के साले विजय के साथ-साथ विजेंदर सिंह नामक गवाह ने आरोपियों के खिलाफ बयान दिए। अदालत ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों को हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर चार लाख तीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। दोषी पाए गए शादाब और शहजाद जिनके पास से तमंचा बरामद हुआ था। उन पर आयुध अधिनियम के अंतर्गत तीस -तीस हजार रुपये का जुर्माना अलग से लगाया गया है।
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