पांच लाख की आबादी को शहर के दूसरे हिस्से जोड़ने वाला कपूर कंपनी पुल रेलवे अधिकारियों के दफ्तर की फाइलों में अटका है। चार माह पहले इस पुल के निर्माण के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए थे। इंजीनियरिंग के अधिकारी के दफ्तर से फाइल पास न होने के कारण किसी को टेंडर अलॉट नहीं हो पा रहा है। इसके कारण लाइनपार व शहर के लोगों को तीन किमी की दूरी तय करके लोकोशेड पुल से आवागमन करना पड़ता है।
रोजाना लाखों की संख्या में लोग लाइनपार से शहर की ओर कपूर कंपनी पुल से आवागमन करते थे। लाइनपार के बच्चे सिविल लाइंस के स्कूलों में पढ़ने जाते हैं, उनके अभिभावकों को लोकोशेड पुल से छोड़ने जाना पड़ता है।
एक छोटे से पुल को बनाने में रेलवे ने इतना समय ले लिया। अभी तक काम शुरू भी नहीं हुआ है। दफ्तर में बैठे अधिकारियों को लोगों की परेशानी का अंदाजा नहीं है। मुझे रोजाना अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने लोकोशेड पुल से जाना पड़ता है। - दिनेश कुमार
पुल बंद होने से काम पर असर पड़ा है। मेरी कपड़े की दुकान है, मेरे अलावा बैंड वाले भी परेशान हैं। शादियों के सीजन में पिछली बार से ऑर्डर काफी कम हैं। इस बार शहर के ऑर्डर नहीं मिले हैं। - विक्की
मैं कचहरी में वकालत की प्रैक्टिस के लिए जाता हूं। कपूर कंपनी पुल बंद होने से लोकोशेड से होकर जाना पड़ता है। इससे न सिर्फ समय ज्यादा लगता है, बल्कि ईंधन भी ज्यादा खर्च होता है। कभी कभी जाम भी मिल जाता है। - शगुन ठाकुर
कपूर कंपनी पुल के टेंडर रेलवे ने आमंत्रित किए हैं। करीब सात करोड़ की लागत से पुल निर्माण होना है। टेंडर जारी होते ही काम शुरू हो जाएगा। अब टेंडर जारी होने में कितना समय लगेगा, यह नहीं कहा जा सकता। - सुधीर सिंह, सीनियर डीसीएम