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Moradabad: युवक को ईंट से सिर फोड़ा... जातिसूचक शब्द बोल गाली दी, एससी-एसटी एक्ट में दोषी को आजीवन कारावास

Sun, 19 May 2024 02:03 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद

सार

मुरादाबाद की एक कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट मामले में दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला जुलाई 2020 को डिलारी थाने में दर्ज कराया गया था। पीड़ित का कहना था कि मारपीट कर उसे अपमानित किया गया था।  
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अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई (सांकेतिक) - फोटो : ANI
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विस्तार
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अदालत ने एससी-एसटी एक्ट के मामले में अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर एक लाख पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर अतिरिक्त सजा काटने के आदेश दिए गए हैं।

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 डिलारी निवासी रविदास सागर ने 27 जुलाई 2020 को डिलारी थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें उसने बताया था कि 27 जुलाई को वह सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान के गोदाम पर पल्लेदारी का काम करने के लिए गया था। उसके साथ विक्की, राजू समेत तीन चार अन्य लोग भी मजदूरी कर रहे थे।

मजदूरी के लिए हमारी बातचीत ग्राम बहेड़ी ब्रहम्नान थाना भोजपुर के सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता जगपाल सिंह से उनका माल उतारने की बात तय हो गई। इस बात से नाराज होकर हमारे ही गांव का ह्रदेश बिगड़ गया। उसने जाति सूचक शब्द कहते हुए धमकाना शुरू कर दिया  ईंट से हमला कर मेरा सिर फोड़ दिया था।
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सिर में चोट लगने पर वह बेहोश होकर गिर गया था। इससे पहले भी आरोपी ने मारपीट की थी। इस मामले में डिलारी थाने की पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। जिसकी जांच सीओ ने की और आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में प्रस्तुत किया।

इस मामले की सुनवाई विशेष न्यायधीश एससी-एसटी एक्ट संदीप गुप्ता की अदालत में की गई। विशेष लोक आनंद पाल सिंह ने बताया कि न्यायालय के सामने पीड़ित और उन लोगों की गवाही दी। जिन्होंने पूरी घटना को देखा था। जबकि बचाव पक्ष की दलील थी कि उसे गांव की रंजिश के चलते झूठा फंसाया गया है।

अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद आरोपी को दोषी करार देते हुए उसे धारा 307 जानलेवा हमला करने के आरोप में दस वर्ष की सजा और तीन हजार रुपये जुर्माना अदा करने का आदेश दिया है।

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा -3(2) वी में आजीवन कारावास और 50 हजार का जुर्माना लगाया है। इसी अधिनियम की धारा -3(1) घ में पांच साल का कारावास और 10 हजार जुर्माना, इसके अलावा धारा-3(1) द में भी इतनी पांच साल की सजा और 10 हजार जुर्माना लगाया है।

धारा 506 में दो साल की सजा और दो हजार जुर्माना, 504 में दो साल की सजा और दो हजार जुर्माना, मारपीट में एक वर्ष की सजा और एक हजार जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है।

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