सोमवार इस सीजन का अब तक का सबसे ठंडा दिन रहा। न्यूनतम और अधिकतम तापमान में कमी दर्ज की गई। कोहरे और ठंड से लोग बेहाल रहे। कोहरे के चलते दृश्यता कम रही। वाहन चालकों को दिन में भी लाइटें जलानी पड़ी। दोपहर में हल्की धूप जरूर निकली, लेकिन वो भी राहत नहीं दे पाई।
सोमवार को न्यूनतम तापमान 5.5 डिग्री और अधिकतम तापमान 16.3 डिग्री सेल्सियस रहा। यह दिन इस सीजन का अभी तक का सबसे ठंडा दिन रहा। वहीं कोहरे की वजह से ठंड और बढ़ गई। दिसंबर के सामान्य तापमान से न्यूनतम तापमान दो डिग्री और अधिकतम तापमान में 5 डिग्री सेल्सियस की कमी दर्ज की गई।
मौसम विशेषज्ञ दिसंबर का सामान्य न्यूनतम तापमान 7 डिग्री और अधिकतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस मानते हैं। ऐसे में सोमवार का दिन सबसे ठंड दिन रहा। सुबह के समय घने कोहरे और ठंड से लोग घरों से निकलने से बचते रहे। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को हुई। वहीं नौकरीपेशा लोगों को भी कोहरे की वजह से खासा परेशानी हुई।
वहीं दोपहर को हल्की धूप तो निकली लेकिन इस धूप से कोहरे और ठंड पर खास असर नहीं पड़ा। लोग ठंड में कंपकंपाते रहे। सुबह कोहरे की वजह से दृश्यता 30 से 35 मीटर मापी गई।
कोहरे और ठंड के कारण बच्चों और सांस के मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। सोमवार को जिला अस्पताल में आने वाले अधिकांश मरीज ठंड के कारण बीमार थे। बच्चे ठंड के कारण जुकाम, खांसी, निमोनिया, उल्टी, दस्त जैसी बीमारियों से परेशान हैं। वहीं तापमान में बदलाव के करण सांस संबंधी बीमारी दमा और सीओपीडी के मरीज अधिक संख्या में पहुंचे।
इस दिन बच्चों में 80 प्रतिशत बच्चे ऐसे आए जो ठंड के कारण बीमार थे। वहीं अन्य दिनों की अपेक्षा दमा और सीओपीडी के 20 प्रतिशत मरीज अधिक आए। फिजिशियन डा. एन के मिश्रा ने बताया कि ठंड में बीपी के मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। उन्हें अपनी दवा की डोज बढ़ानी बड़ती है। वहीं रेस्पाइरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होने से सांस के मरीजों को अधिक परेशानी होने लगती है। ठंड के कराण इस दिन जिला अस्पताल में 1475 मरीज पहुंचे।
कड़ाके की ठंड में शहर में लोग जगह-जगह कूड़े के ढेरों में आग लगाकर ठंड से बचते दिखे। नगर निगम की ओर से दिन के समय कहीं भी अलाव की व्यवस्था नहीं की गई थी। वहीं शाम को भी नगर निगम मात्र 15 सार्वजनिक स्थानों पर ही अलाव के लिए लकड़ी मुहैया करा रहा है।
मुरादाबाद बस अड्डे पर लोगों ने बताया कि यहां नगर निगम पर्याप्त लकड़ी नहीं डालता। उनकी लकड़ी मात्र दो से तीन घंट में ही समाप्त हो जाती है। जब कि यहां यात्री रात भर खड़े होकर अपनी-अपनी गाड़ियों का इंतजार करते हैं। ठंड में जलती आग उनके लिए बड़ा सहारा होती है। यहां स्थाई रूप से रहने वाले दुकानदारों ने बताया कि वह अपने स्तर से भी लकड़ी की व्यवस्था करते हैं जिससे यात्रियों को परेशानी न हो।
पिछले सालों तक नगर निगम रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन पर यात्रियों और जरूरतमंदों के लिए अस्थाई रैन बसेरा बनाता था। लेकिन इस साल अभी तक ऐसी कोई पहल नहीं की गई है।रेलवे स्टेशन के बाहर पर रिक्शे वाले, आटो वाले और अन्य जरूरतमंदों ने बताया कि उन्हें मजबूरन पचास रुपये खर्च कर प्राइवेट रैन बसेरा में रुकना पड़ता है।
पिछले सालों तक यहां पंडाल डालकर नगर निगम लोगों और यात्रियों के लिए बिस्तर की व्यवस्था करता था लेकिन इस महीने अभी तक ऐसे कोई व्यवस्था नहीं की गई। वहीं मुरादाबाद बस स्टेशन पर पुलिस चौकी के पीछे अस्थाई रैन बसेरा बनाया जाता था। लेकिन अब इस जगह को पार्किंग के लिए दे दिया गया है।
ऐसे में नगर निगम यहां रैन बसेरा बनाएगा या नहीं इस संबंध में निगम के अधिकारी कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं। इस संबंध में पूछे जाने पर नगर आयुक्त अवनीश कुमार शर्मा ने बताया कि वह अपनी टीम से बात कर इस संबंध में कुछ कह पाएंगे।