मुरादाबाद। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा से खनन सामग्री लाने वाले वाहनों में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। जांच के दौरान खुलासा हुआ कि कुछ वाहनों में अंतरराज्यीय ट्रांजिट पास (आईएसटीपी) के साथ छेड़छाड़ कर अवैध रूप से उपखनिज की ढुलाई की जा रही थी। इस गड़बड़ी से सरकार को रायल्टी के रूप में भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा था।
सीमा पर वाहनों की नियमित जांच में तैनात लेखपालों ने पाया कि कई ट्रांजिट पास फोटोशॉप या अन्य डिजिटल तरीकों से बदले गए थे। इन पासों में उपखनिज का नाम, मात्रा और पास जारी होने का समय तक बदल दिया गया था। जिससे पुराने या कम रायल्टी वाले पास के सहारे नए वाहन आसानी से निकाले जा सकें। इस तरह कूट रचना कर खनन सामग्री को उत्तराखंड से उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश कराया जा रहा था।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि उत्तराखंड से मुरादाबाद की ओर रोजाना बड़ी संख्या में खनन सामग्री से भरे वाहन आते हैं। नियमों के अनुसार यूपी सीमा में प्रवेश करने से पहले हर वाहन के पास वैध अंतरराज्यीय ट्रांजिट पास होना अनिवार्य है। इन्हीं पासों में फर्जीवाड़े का खेल चल रहा था, जिसकी भनक लेखपालों को जांच के दौरान लगी। लेखपालों ने इस पूरे मामले की जानकारी तत्काल एसडीएम और जिलाधिकारी को दी। सूचना मिलते ही जिलाधिकारी अनुज सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए। उन्होंने एडीएम वित्त ममता मालवीय, एसडीएम सदर डॉ. राम मोहन मीणा और खान अधिकारी राघवेंद्र सिंह को शामिल करते हुए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है।
कमेटी तो दो दिन में पूरी करनी होगी जांच
डीएम द्वारा बनाई गई कमेटी दो दिनों के भीतर पूरे प्रकरण की गहन जांच करेगी। जांच के दौरान संदिग्ध ट्रांजिट पासों को पोर्टल पर मिलान कर देखा जाएगा और जिन वाहनों या व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आएगी, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। प्रशासन का कहना है कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। इस खुलासे के बाद सीमा पर खनन वाहनों की जांच और सख्त कर दी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खनन सामग्री की अवैध ढुलाई और रायल्टी चोरी पर अब कड़ी नजर रखी जाएगी, ताकि सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों पर प्रभावी कार्रवाई हो सके।