मीट माफिया का यह पहला कारनामा नहीं है। मामला रेलवे के गेट मैन की उंगलियां काटने तक नहीं सिमटा है। मुरादाबाद में गहरे तक पैठ बना चुका मीट माफिया रास्ते में रोड़ा बनने पर पुलिस वालों की भी हत्या कर चुका है। कटघर में तीन साल पहले नेशनल हाईवे पर एक दरोगा को मीट माफिया ने ट्रक से कुचलकर मार डाला था।
पुलिस पार्टियाें पर ट्रक चढ़ाने की कई घटनाएं हुई हैं। पांच साल पहले तत्कालीन डीआईजी एके सिंह पर सुनियोजित हमले के पीछे भी यही सिंडिकेट था। कसूरवार खाकी भी कम नहीं है। हालात ये हैं कि जिले के चार थाने मीट माफिया की ‘पगार’ पर ही चलते हैं।
पुलिस और नेताओं के गठजोड़ से फल - फूल रहे मीट माफिया का दुस्साहस इस कदर बढ़ चुका है कि खुलेआम प्रतिबंधित पशुओं की तस्करी में उन्हें रत्तीभर डर नहीं लगता। पशुओं की चोरी के साथ ही जिले में पशुओं की लूट की घटनाएं भी मीट सिंडिकेट की ही बदौलत तेजी से बढ़ी हैं।
चोरी किए पशुओं को रातोंरात मीट फैक्ट्रियों में काटकर पैक कर दिया जाता है। पुलिस सरपरस्ती की वजह से प्रतिबंधित पशुओं और मीट के ट्रासंपोर्टेशन में भी कोई दिक्कत नहीं आती। दरअसल अरब देशों में गोमांस की बढ़ती डिमांड की वजह से मीट माफियाओं को करोड़ों रुपये का मुनाफा होता है। इस मुनाफे के लिए वो कोई भी रिस्क लेने को तैयार रहते हैं।
तीन साल पहले कटघर में नेशनल हाईवे बाईपास पर मीट माफिया ने गोवंशीय पशुओं से लदा ट्रक रोकने पर एक दरोगा को कुचलकर मार डाला था। जुलाई 2010 में डींगरपुर में तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह पर कातिलाना हमले के पीछे भी मीट लॉबी ही थी।
डीआईजी एके सिंह ने कुंदरकी और मैनाठेर क्षेत्र में अवैध स्लाटर हाउसों और गोवंशीय पशुओं की तस्करी पर सख्ती से रोक लगाई थी। शनिवार रात भोजपुर इलाके में रेलवे के गेटमैन की उंगलियां काटकर मीट माफिया ने साफ कर दिया है कि उन्हें पुलिस - प्रशासन का कोई खौफ नहीं है।