मुरादाबाद। एमडीए की अन्य आवास परियोजना की तरह ही पंडित नगला रोड हनुमान मूर्ति के पास स्थित विध्यांचल इन्क्लेव की भी बेकद्री हो रही है। पिछले छह सालों में 110 फ्लैट वाली चार मंजिला इमारत के अलग अलग टावरों में अधिकतर भवन खाली हैं। खास बात यह है कि मुख्य मार्ग पर फ्रंट पर 12 दुकानें भी हैं, जिसमें सिर्फ एक में आवंटी से किराए पर ढ़ाबा संचालित हो रहे हैं, शेष दुकानें खंडहर होने लगी हैं।
एमडीए ने वर्ष 2018-19 में हनुमान मूर्ति पर पंडित नगला रोड पर देहरी मुस्तहकम के रकबे में पर्वत शृंखला के नाम पर विध्यांचल इन्क्लेब के नाम से चार मंजिला तीन टावर बनाए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से 2 बीएचके के 110 फ्लैट तैयार किए। बिजली पानी व सीवर की व्यवस्था भी की लेकिन यहां तीन परिवार ऐसे भी रहे, जिन्होंने अपनी जमीन एमडीए को नहीं सौंपी और घर बनाकर वहीं रह रहे हैं, जिनका रास्ता भी इसी कॉलोनी से है। यहां पर एमडीए ने पानी की टंकी तो बनाई लेकिन आवासों तक पानी एक दिन भी पहुंचा। पिछले छह सालों में इस इन्क्लेव में सिर्फ चार फ्लैट ही बिके हैं, जिसमें दो रहते हैं, शेष दो ने अपना फ्लैट किराए पर दे रखा है। फ्रंट पर 12 दुकानें हैं, जिसमें 11 खाली हैं, एक आवंटी ने दुकान ली लेकिन उसने किराए पर दे दी, जिसमें किराएदार शिवा ढाबा संचालित कर रहा है। शेष दुकानें गंदगी और देखरेख के अभाव में खंडहर होने लगी है। यहीं स्थिति आवासों की भी हैं, क्योंकि यहां एमडीए ने होमगार्ड तो रखे हैं लेकिन आवासों की देखरेख न होने के कारण फ्लैट खराब होने लगे हैं।
- फ्लैट तो अच्छे हैं, दो कमरे, बालकोनी, शौचालय, बाथरूम, हाल आदि हैं, 75 वर्ग मीटर में एक फ्लैट है। वर्ष 2022 में मैंने 27 लाख रुपये में फ्लैट लिया था, परिवार सहित रह भी रहा हूं। पेयजल की सुविधा ने होने से अपना सबमर्सिबल लगाया है। बिजली का मीटर भी लगवा लिया है। यहां कोई सफाई कर्मचारी नहीं आता है। कीमत अधिक होने और मूलभूत सुविधाएं न होने के कारण लोग यहां फ्लैट नहीं ले रहे हैं।
-समीर ख्रान, आवंटी
- यह दुकान तो आवंटी से किराए पर ली है, आसपास की सभी दुकानें खाली हैं, गंदगी रहती है, महंगी होने के कारण दुकानें नहीं ले पाते हैं। ग्राउंड फ्लोर के फ्लैट की कीमत 31 लाख हैं, दुकानों की और अधिक है। यहां लोग आते हैं लेकिन कोई सही जानकारी देने वाला नहीं होता है, तो लोग लौट जाते हैं। एमडीए यहां कार्यालय खोले, प्रचारित करें तो फ्लैट बिकेंगे लेकिन करोड़ों रुपये लगाकर यूं ही खंडहर होने के लिए छोड़ दिया है।
-राजू, ढाबा कर्मी
00
- विध्यांचल इन्क्लेव आवास परियोजना भी आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए हैं, इसे बोर्ड की बैठक में रखा गया था, इसका पुनरमूल्यांकन किया जाएगा, कीमतों में भी कमी आ सकती हैं, जिसके बाद संभवत: फ्लैट बिक सकेंगे।
- अनुभव सिंह, उपाध्यक्ष एमडीए।