मुरादाबाद। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के 110 कर्मियों की सेवाएं खत्म किए जाने के विरोध में शुक्रवार को जिले भर के कर्मचारी सड़कों पर आ गए। कर्मियों की बहाली के लिए बाइक रैली निकालकर प्रदर्शन किया और कमिश्नर कार्यालय के सामने धरना दिया। इस दौरान कर्मचारी नेताओं ने कमिश्नर वीरेंद्र कुमार सिंह को भी घेरा और उनसे वार्ता करते हुए चेतावनी दी कि साथी कर्मियों की बहाली न हुई तो 22 जनवरी से जिले की सभी सेवाएं ठप कर दी जाएंगी। मंडलायुक्त ने कर्मियों से ज्ञापन लेकर उनकी मांग पर एमडीए से रिपोर्ट मंगाकर मामले में हस्तक्षेप करने का आश्वासन दिया है।
जिले भर के कर्मचारी संगठनों से जुड़ी मुरादाबाद कर्मचारी समन्वय समिति के बैनर तले एमडीए दफ्तर के बाहर एकत्र हुए। दोपहर बाद तक यहां धरना दिया, फिर समन्वय समिति के अध्यक्ष संदीप बडोला के नेतृत्व में एमडीए दफ्तर से कमिश्नर कार्यालय तक बाइक रैली निकाली गई। रैली में कर्मचारी एकता जिंदाबाद और एमडीए वीसी मुर्दाबाद के नारे लगाते कर्मचारी नेता, पीड़ित कर्मियों और उनके परिवार के लोगों में जोश और गुस्सा दिखाई दिया। यह रैली कमिश्नर दफ्तर के बाहर पहुंचकर धरने में बदल गई। सभी कर्मचारी सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। धरनास्थल पर अध्यक्ष संदीप बडोला ने कहा कि एक तरफ सरकार किसी की भी नौकरी न लेने की बात कह रही है। शासनादेश जारी कर विनियमितीकरण किया जा रहा है, वहीं आदेशों को नजरअंदाज कर एमडीए उपाध्यक्ष ने 110 कर्मियों की रोजी रोटी छीन ली है। वह भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। पश्चात कर्मचारियों का प्रतिनिधिमंडल ने आयुक्त से मिलकर वार्ता की। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि एमडीए उपाध्यक्ष की हठधर्मिता से 110 कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि साथी कर्मियों को बहाल न किया गया तो 18 जनवरी से दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल करेंगे और फिरभी सुनवाई न हुई तो 22 से सभी सेवाएं ठप कर आंदोलन करेंगे।
आयुक्त से कहा, साथियों की नौकरी लौटा दो वरना आत्मदाह कर लेंगे
संगठन के अध्यक्ष संदीप बडोला और सचिव मोहम्मद सुबहान सहित नेताओं ने कमिश्नर वीरेंद्र कुमार सिंह से साथियों की बहाली करने पर अड़ गए। आयुक्त ने प्राधिकरण से रिपोर्ट मंगाने और मामले में कमेटी बनाकर वार्ता करने का आश्वासन दिया। इस पर अध्यक्ष ने कहा कि उपाध्यक्ष ने गलत ढंग से कर्मियों को निकाल दिया है और वह झूठी रिपोर्ट प्रस्तुत कर देती हैं। उन्हें कोई वार्ता नहीं करनी है। अपने साथियों की बहाली चाहिए और यदि ऐसा नहीं हुआ तो वह 22 जनवरी से सभी सेवाएं ठप कर देंगे, फिरभी सुनवाई नहीं हुई तो आत्मदाह कर लेंगे।
आयुक्त ने दिया भरोसा, कहा- रिपोर्ट मंगा ली है
मंडलायुक्त वीरेंद्र कुमार सिंह ने कर्मचारियों के तेवर देखते हुए उन्हें सब ठीक होने का भरोसा दिया। साथ ही कहा कि उन्होंने प्राधिकरण से इन कर्मियों की बाबत पूरी रिपोर्ट मंगा ली है। रिपोर्ट आने के बाद जरूरत पड़ी तो कमेटी बनाकर विचार विमर्श किया जाएगा। उन्होंने कर्मचारी हित की बात कही।
आयुक्त को सौंपे गए ज्ञापन के मुख्य बिंदु
- 31 दिसंबर 2001 के पूर्व से कार्यरत इन कर्मियों का विनियमितीकरण शासन में प्रस्तावित है
- प्राधिकरण बोर्ड ने न्यूनतम वेतनमान 11 हजार प्रतिमाह से बढ़ाकर 18 हजार स्वीकृत किया
- 04 दिसंबर 20 की बोर्ड बैठक में भी इन कर्मियों का वेतन यथावत रखने का निर्णय लिया गया
- इसके बाद भी 21 दिसंबर से सभी की सेवाएं खत्म कर दी गईं
- शासनादेश के अनुसार प्राधिकरण में तीन वर्ष की लगातार सेवा और 240 दिन की अवधि पूर्ण करने वाले कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश है
- दैनिक वेतन कर्मियों की 25 से 30 वर्ष की सेवाओं को नजरअंदाज किया गया
- धरने को समाप्त कराने के लिए प्राधिकरण प्रशासन धमकियां दे रहा है
व्यथा सुनाते तीन महिलाएं हुईं बेहोश
धरना प्रदर्शन में एमडीए से हटाए गए कर्मचारियों के परिवारीजन भी शामिल हुए। इसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। जुलूस के दौरान बच्चे अपने हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी कर रहे थे। इससे उनका गुस्सा झलक रहा था। कमिश्नर कार्यालय के सामने सभी कर्मचारी धरने पर बैठे थे। इसी दौरान तीन महिलाएं अपनी व्यथा सुनाते हुए बेहोश हो गईं। इससे अन्य कर्मचारी और गुस्से में आ गए और नारेबाजी करने लगी। तभी लोगों ने महिलाओं के चेहरे पर पानी छिड़का, तब जाकर उनकी स्थिति सामान्य हुई।
प्रदर्शनकारियों में यह हुए शामिल
प्रदर्शनकारियों में कर्मचारी संयुक्त संगठन के अध्यक्ष संजय कुमार सत्संगी, अशोक कुमार शर्मा, चंद्र शेखर शर्मा, जेपी मौर्या, शिवकुमार, विपिन रस्तोगी, मनोज तिवारी, रंजीत सिंह काका, विपिन भट्ट, हेमंत चौधरी, शालिनी भटनागर, पूनम मैसी, कमल सिंह, विजेंद्र सिंह, मोहम्मद अली वारसी, जेडए नकवी, रवि द्रविड़, सविता गुप्ता, शालिनी भटनागर आदि शामिल रहीं।