एक दशक से अधिक समय से वीरान पड़े नया मुरादाबाद स्थित एमडीए के अधिकारियों व कर्मचारियों के आवासों को आबाद करने की कवायद शुरू हो गई है। खंडहर में तब्दील होने की तरफ बढ़ रहे इन भवनों की मरम्मत, रंग रोगन आदि का काम किया जाएगा।
इसके लिए सर्वे के साथ एस्टिमेट तैयार किया जा रहा है। वर्ष के अंत तक अधिकारी-कर्मचारियों को यहां शिफ्ट किए जाने की तैयारी चल रही है। एमडीए की ओर से करीब दो दशक पहले नया मुरादाबाद योजना लांच की गई थी।
उसी समय कांठ रोड आशियाना में स्थित एमडीए के कार्यालय, वीसी आवास और कर्मचारियों के आवास को भी नया मुरादाबाद में शिफ्ट करने की योजना एमडीए ने बनाई थी। धीरे-धीरे जब एमडीए की आवासीय कॉलोनी में लोगों ने बसना शुरू कर दिया तो एमडीए के अधिकारियों ने भी वहां अपना कार्यालय, आवास शिफ्ट करने की योनजा को अमली जामा पहनाने का प्रयास शुरू कर दिया।
जिसके क्रम में करीब एक दशक पहले मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने दिल्ली रोड पर अपना नया कार्यालय का निर्माण कराया। साथ ही वीसी और अन्य कर्मचारियों के आवासों का भी निर्माण कराया।
करीब दो साल पहले कांठ रोड के पुराने एमडीए कार्यालय भवन को नया मुरादाबाद स्थित नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया, लेकिन संबंधित क्षेत्र में कम आबादी के कारण अधिकारियों और कर्मचारी अपने आवास में नहीं शिफ्ट किए जा सके। देखरेख, रंगरोगन आदि के अभाव में यह आवास जर्जर होते जा रहे हैं।
परिसर में बड़ी-बड़ी झाड़ झंकाड़ वहां उग आई है। लेकिन अब वीरान और खंडहर में तब्दील होती जा रही नया मुरादाबाद स्थित अधिकारी और कर्मचारियों की इस आवासीय कॉलोनी की दशा जल्द ठीक की जाएगी। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है।
वीसी के निर्देश पर आवासों का सर्वे करने के साथ उसकी मरम्मत आदि का एस्टिमेट तैयार कराया जा रहा है। अगले महीने इसकी मरम्मत का काम भी लगभग शुरू हो जाएगा। वर्ष के अंत तक कर्मचारियों और अधिकारियों को आशियाना कॉलोनी से नया मुरादाबाद योजना की कॉलोनी में शिफ्ट करने की योजना है।
एमडीए का कार्यालय नया मुरादाबाद स्थित भवन में शिफ्ट करने के बाद कर्मचारियों, अधिकारियों की बनी आवासीय कॉलोनी में अधिकारियों, कर्मचारियों को शिफ्ट करने की तैयारी है। देखरेख अभाव में जर्जर हो चुके इन आवासों को बेहतर बनाने के लिए सर्वे करा एस्टिमेट तैयार किया जा रहा है। वर्ष के अंत तक वहां शिफ्टिंग की तैयारी है। इससे आशियाना कॉलोनी से आने-जाने में कर्मचारियों, अधिकारियों का समय भी कम लगेगा।
- शैलेष कुमार, वीसी, एमडीए