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UP: मनरेगा फर्जीवाड़ा में बड़ी कार्रवाई... आठ निलंबित, क्रिकेटर शमी की बहन की सास से होगी 8.68 लाख की वसूली

Thu, 03 Apr 2025 03:43 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, अमरोहा

सार

Amroha News: अमरोहा में मनरेगा फर्जीवाड़े के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। जांच के बाद डीएम ने आठ अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बहन की सास से 8.68 लाख की वसूली होगी।
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Mohammed Shami Sister MNREGA - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बहन शबीना, बहनोई गजनबी और कुछ अन्य परिजनों को मनरेगा मजदूर दर्शाकर बड़ा भुगतान लेने के मामले में शबीना की सास गुले आयशा से 8.68 लाख रुपये की वसूली की जाएगी। इसके अलावा डीएम ने तत्कालीन तीन पंचायत सचिव उमा, अंजुम व पृथ्वी और एपीओ ब्रजभान सिंह समेत आठ अधिकारी-कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है।
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साथ ही तत्कालीन बीडीओ प्रतिभा अग्रवाल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा है। वहीं, एक पंचायत सचिव को प्रतिकूल प्रविष्टि दी है। डीएम ने सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के भी आदेश दिए हैं। 

क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बहन शबीना की सास ही मनरेगा फर्जीवाड़े से जुड़े गांव पलौला की प्रधान हैं। उनके अधिकार भी सीज होंगे। मामले की जांच कमेटी ने बुधवार को रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है। जांच में कमेटी ने तत्कालीन बीडीओ व चार सचिवों समेत कुल 11 लोगों को फर्जीवाड़े का दोषी माना है। 
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जांच रिपोर्ट मिलने के बाद डीएम ने बीडीओ व एक सचिव पर विभागीय कार्रवाई तथा तीन सचिवों समेत आठ कर्मियों पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए है। साथ ही प्रधान (शमी की बहन की सास) से मनरेगा मजदूरी के तहत निकाली गई 8.68 लाख रुपये की रिकवरी के लिए कहा है। प्रधान के रूप में उनके अधिकार सीज करने की कार्रवाई की जाएगी।

डीएम निधि गुप्ता वत्स ने कहा कि दोषी कर्मचारियों पर निलंबन की कार्रवाई भी होगी। डीएम ने परियोजना निदेशक व डीसी मनरेगा अमरेंद्र प्रताप सिंह को इस मामले की जांच सौंपी थी। कमेटी पिछले एक सप्ताह से मनरेगा में फर्जीवाड़े के हर पहलु को ध्यान में रखकर जांच कर रही थी। 

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तत्कालीन बीडीओ प्रतिभा अग्रवाल भी दोषी
जांच में प्रधान के परिवार के आठ लोगों समेत कुल 18 लोगों द्वारा बिना मजदूरी किए 8.68 लाख रुपये की रकम निकालने की बात सामने आई है। इसमें ब्लॉक के कर्मचारी भी दोषी पाए गए हैं। जांच कमेटी ने एक तत्कालीन बीडीओ प्रतिभा अग्रवाल को भी दोषी माना है। इसके अलावा पंचायत सचिव उमा, अंजुम व पृथ्वी, एपीओ ब्रजभान सिंह, तत्कालीन रोजगार सेवक झम्मन लाल, कंप्यूटर ऑपरेटर शराफत अली, तकनीकी सहायक अजय निमेष व लेखाकार विजेंद्र सिंह को दोषी पाया है।

जांच रिपोर्ट मिल गई है। मामले में दोषी ग्राम प्रधान के अधिकार सीज करते हुए सरकारी धन की रिकवरी भी होगी। साथ ही दोषी मिले सभी अधिकारी-कर्मचारियों को निलंबित करते हुए एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए है। तत्कालीन बीडीओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा है। एक पंचायत सचिव को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। - निधि गुप्ता वत्स, डीएम

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यह था पूरा मामला
जोया ब्लॉक के गांव पलौला में क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बहन शबीना की सास गुले आयशा पत्नी शकील अहमद ग्राम प्रधान हैं। वह 2021 में हुए चुनाव में चुनी गईं थी। इससे पहले भी उनके परिवार में उनके पति व ससुर ग्राम प्रधान रहे हैं। प्रधान बनने से पहले ही उनके बेटे और क्रिकेटर शमी के बहनोई गजनबी समेत परिवार के आठ व कई अन्य लोगों के गलत तरीके से जॉब कार्ड बनवा दिए गए। जनवरी 2021 में यह सभी जॉब कार्ड बनवाए गए थे। 

इसके बाद जुलाई 2021 से लगातार मनरेगा में काम करना दर्शाते हुए परिवार के लोगों ने 4.55 लाख रुपये समेत अन्य लोगों द्वारा कुल 8.68 लाख रुपये की मजदूरी ले ली गई। जबकि मौके पर काम किए जाने का साक्ष्य कोई भी नहीं दे पाया। एक सप्ताह पहले मामला सुर्खियों में आया तो डीएम निधि गुप्ता वत्स ने मामले की जांच परियोजना निदेशक व डीसी मनरेगा अमरेंद्र प्रताप सिंह को सौंपी थी। एक दिन बाद गांव के कुछ लोगों ने भी कलक्ट्रेट में पहुंचकर डीएम से प्रधान द्वारा और भी कई लोगों को मनरेगा का लाभ दिए जाने की शिकायत की थी। 

कमेटी ने हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच की। गांव पहुंच कर लोगों से मौखिक बयान भी दर्ज किए। हालांकि, इस दौरान प्रधान के परिवार का कोई सदस्य जांच टीम के सामने नहीं पहुंचा। लेकिन, दोनों पक्षों के लोग मौके पर मौजूद रहे तथा अपनी-अपनी बातें रखी। जांच कमेटी की ओर से सभी के मौखिक बयान दर्ज किए गए। इसके बाद सभी रिकॉर्ड को खंगालते हुए जांच को अंजाम तक पहुंचाया।

जांच में केवल प्रधान को माना दोषी
जांच कमेटी ने पूरे प्रकरण में सिर्फ प्रधान गुले आयशा को दोषी माना है। जबकि, फर्जीवाड़े का पूरा सूत्रधार उनका बेटा व क्रिकेटर मोहम्मद शमी का बहनोई गजनबी बताया जा रहा है। गजनबी द्वारा ही अपना रौब गालिब कर मौके पर लोगों की हाजिरी लगाई जाती थी। सभी का जॉब कार्ड बनवाए जाने में भी गजनबी की ही भूमिका बताई जा रही है, लेकिन जांच में गजनबी को क्लीन चिट दे दी गई है।

वहीं, मामले में प्रधान को ही दोषी माना गया है। जिसके चलते उनसे सभी के द्वारा ली गई मनरेगा मजदूरी के 8.68 लाख रुपये की रिकवरी की जाएगी। साथ ही उनके अधिकार सीज करने की कार्रवाई भी होगी। वहीं, दोषी मिले सभी कर्मचारियों ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन ठीक से नहीं किया। जिससे सरकारी धन की बड़ा दुरुपयोग सामने आया।

जांच के दौरान कटे तीन बहनों के नाम
ग्राम प्रधान गुले आयशा के परिवार के आठ लोग मनरेगा मजदूरी का बिना काम किए लाभ ले रहे थे। पिछले वर्ष जुलाई माह में इनमें से पांच लोगों के जॉब कार्ड निरस्त कर दिए गए थे। यह कार्रवाई सीडीओ अश्वनी कुमार मिश्रा के निर्देश पर पूरे जिले में की गई थी। इसमें पलौला में भी 32 जॉब कार्ड निरस्त हुए थे, लेकिन प्रधान की तीन बेटियों के नाम उस समय निरस्त नहीं किए गए थे। अब मामले की जांच शुरू हुई तो उनके नाम भी सामने आए। जिसके बाद तीनों के जॉब कार्ड को निरस्त कर दिया गया। तीन बहनों में एक बहन की शादी भी हो चुकी है।

पंचायत से लेकर ब्लॉक स्तर तक हुई लापरवाही
यूं तो मनरेगा को लेकर कई पंचायतों में गड़बड़ी का खेल सामने आता रहा है, लेकिन पलौला में हुए इस फर्जीवाड़े में छोटी से लेकर बड़ी कड़ी तक की लापरवाही सामने आई है। पंचायत स्तर से लेकर मनरेगा योजना के लिए जिम्मेदार सभी कर्मचारियों ने लापरवाही बरती। जिससे फर्जीवाड़े का बड़ा खेल सामने आया है। इससे पहले भी कई नसीर नंगला, खेड़ा समेत कई गांवों में मनरेगा में लापरवाही सामने आई थी।

मामला एक जैसा, कार्रवाई अलग-अलग
हाल में अमरोहा ब्लॉक के गांव नसीर नंगला में भी इसी तरह का मामला सामने आया था। यहां ग्राम प्रधान नरेंद्र सिंह द्वारा अपनी पत्नी कमलेश और बेटी आशी व हिमानी का जॉब कार्ड बनवाते हुए 55270 रुपये तथा रोजगार सेवक दीपक कुमार ने पिता तिरमल सिंह व माता निमलेश के नाम मजदूरी दर्शाकर 68720 रुपये निकाले थे। मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से की गई थी।

इसकी जांच के बाद दोनों को दोषी पाया था। मामले में पंचायत सचिव सुमित कुमार का स्पष्टीकरण भी तलब किया गया था। जांच के बाद प्रधान व रोजगार सेवक से निकाली गई मजदूरी की रकम 1.24 लाख रुपये की वसूली कर ली गई थी। इसके बाद डीएम ने दोनों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे।

साथ ही ग्राम प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज करने की संस्तुति भी की गई थी। बीडीओ नीरज गर्ग द्वारा नौगांवा सादात थाने में रोजगार सेवक व ग्राम प्रधान पर एफआईआर कराने के लिए तहरीर भी दे दी गई। लेकिन, पलौला के मामले ग्राम प्रधान पर केवल रिकवरी व अधिकार सीज करने की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। यहां प्रधान पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश नहीं किया गया। एक तरह के मामलों में दो अलग-अलग तरह की कार्रवाई होना भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
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जांच रिपोर्ट पूरी कर डीएम को सौंप दी गई है। डीएम की और से मिले निर्देशों के तहत कार्रवाई की जा रही है। - अमरेंद्र प्रताप सिंह, परियोजना निदेशक/ डीसी मनरेगा

चलेगा विशेष अभियान : डीएम
डीएम निधि गुप्ता वत्स ने बताया कि जिले में मनरेगा में फर्जीवाड़ों पर अंकुश लगाने को विशेष अभियान चलाया जाएगा। सभी मस्टररोल की जांच कराई जाएगी तथा अपात्र लोगों के नाम जॉब कार्ड से हटाए जाएंगे।

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