ठाकुरद्वारा (मुरादाबाद)। तीन माह पहले तेजाब से हमला करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला अधिवक्ता समेत पांच लोगों के खिलाफ युवक ने अपहरण कर जबरन विवाह कराने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया है। पीड़ित युवक ने आरोप लगाया कि विवाह पंजीकरण में बाइक मैकेनिक सुरेंद्र सिंह को शादी करने वाला पंडित बताया गया है। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर पांचों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
उत्तराखंड के कुंडा थाना क्षेत्र के लालपुर गांव निवासी सचिन कुमार ने कोर्ट में प्रार्थनापत्र दाखिल किया था, जिसमें बताया कि आठ अप्रैल 2024 की सुबह करीब दस बजे वह काशीपुर जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में ठाकुरद्वारा नगर निवासी युवती प्रिंसी, उसके पिता राजेंद्र सिंह, भाई अजय और अक्षय व ठाकुरद्वारा निवासी अधिवक्ता शशिबाला ने उसका अपहरण कर लिया।
आरोप लगाया कि सभी उसे ठाकुरद्वारा में विवाह पंजीकरण अधिकारी के कार्यालय में ले गए और विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र ले लिया, जिसमें सचिन का प्रिंसी के साथ विवाह दिखाया गया। युवक का कहना है कि विवाह का प्रमाणपत्र फर्जी है। पंजीकरण के दाैरान विवाह कराने वाले पंडित की जगह बाइक मैकेनिक सुरेंद्र सिंह का नाम लिखा गया है। सुरेंद्र सिंह प्रिंसी के चाचा हैं।
कोर्ट ने थाना पुलिस को रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए। एसपी देहात कुंवर आकाश सिंह ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। विवेचना में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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अधिवक्ता ने सचिन पर दर्ज कराया था तेजाब हमले का केस
करीब तीन माह पहले अधिवक्ता शशिबाला ने ठाकुरद्वारा में केस दर्ज कराया था, जिसमें आरोप लगाया था कि कचहरी जाते समय लालपुर निवासी सचिन और एक अन्य युवक ने तेजाब से हमला किया। पुलिस ने इस मामले में सचिन समेत दो लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। हालांकि, जांच में आरोप झूठे पाए गए। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में एफआर लगाकर केस बंद कर दिया था। अब सचिन ने महिला अधिवक्ता पर केस दर्ज कराया है।
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आठ अप्रैल 2024 को सचिन और प्रिंसी की शादी कई लोगों की मौजूदगी में कराई गई थी। इस मामले में कई लोगों ने शपथपत्र भी दिए हैं। प्रिंसी ने सचिन के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया है। मुकदमा कोर्ट में विचाराधीन है। जिसकी पैरवी करने पर ही मुझ पर तेजाब से हमला किया गया था। अब अपहरण का झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया है। -शशिबाला, महिला अधिवक्ता