टायलेट का दरवाजा तोड़कर किया था हमला, छीन ली थी पिस्टल
भीड़ को समझाने पहुंचे तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह पर लोगों ने अचानक हमला कर दिया था। वह अपनी जान बचाने के लिए डींगरपुर में पेट्रोल पंप पर टायलेट में छिप गए थे लेकिन भीड़ वहां तक पहुंच गई थी। ईंट पत्थर मारकर टायलेट का दरवाजा तोड़ दिया था। इसके बाद भीड़ ने उस पर हमला कर दिया और उनकी पिस्टल भी छीन ली थी। पुलिस ने लोगों से पिस्टल बरामद की थी।
तत्कालीन डीआईजी समेत 20 पुलिस कर्मी हुए थे घायल
इस घटना में डीआईजी अशोक कुमार सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके अलावा उस वक्त के डीएम राजशेखर के अलावा पुलिस कर्मी राकेश कुमार, सुनील कुमार, राम विलास, सतीश समेत अन्य पुलिस कर्मी भी घायल हो गए थे। इस मामले में चार मुकदमे दर्ज किए गए थे।
डीआईजी के सिर और दोनों हाथों की उंगलियों में हो गया था फ्रैक्चर
तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह पर भीड़ ने इस कदर हमला किया था कि उनके सिर में गंभीर चोट आई थीं और दोनों हाथों की उंगलियों में फ्रैक्चर हो गया था। सिर में 20 टांके लगे थे। करीब तीन माह तक उनका उपचार चला था। अशोक कुमार सिंह वर्तमान में अपर पुलिस महानिदेशक हैं और लखनऊ में तैनात हैं।
तत्कालीन डीएम समेत 24 लोगों के हुए थे बयान
एडीजीसी बृजराज सिंह ने बताया कि मैनाठेर बवाल कांड में बयान दर्ज कराने के लिए 51 लोगों की लिस्ट बनाई गई थी। इस मामले में एडीजी एवं मुरादाबाद के तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह और प्रवर निदेशक जल निगम ग्रामीण उत्तर प्रदेश एवं मुरादाबाद के तत्कालीन डीएम राज शेखर, डीआईजी के पीआरओ रवि कुमार, डीआईजी की पिस्टल बरामद करने वाले एसएसआई जसवीर सिंह, पेट्रोल पंप में सेल्समैन संतराम सिंह, सिपाही राकेश कुमार, मोहम्मद हुसैन, कौशलेंद्र, सुनील कुमार, सतीश चंद्र व राम निवास के बयान भी दर्ज कराए गए थे।
भागने वाले सात पुलिस कर्मी किए गए थे बर्खास्त
मैनाठेर में बवाल में भीड़ के बीच डीआईजी अशोक कुमार सिंह को भीड़ में फंसा छोड़ भागने वाले सात पुलिसकर्मियों को बर्खास्त किया गया था। इनमें से एक हेड कांस्टेबल पहले ही रिटायर हो चुका है। यह सभी पुलिस कर्मी बाद में कोर्ट चले गए थे। मैनाठेर बवाल के एक माह बाद डीआईजी की सुरक्षा में लगे पुलिस कर्मी निलंबित कर दिए गए थे।
इसके बाद धारा 14(1) के तहत जांच तत्कालीन एसपी सिटी पीयूष श्रीवास्तव ने की थी। एसपी सिटी ने सशस्त्र पुलिस के हेड कांस्टेबल रमेश चंद्र, प्रदीप तोमर, कांस्टेबल दिलीप सिंह, विक्रम सिंह, ड्राइवर धर्मपाल और जयवीर सिंह की बर्खास्तगी की संस्तुति की थी। हेड कांस्टेबल रमेश चंद्र पहले ही सेवा निवृत्त हो गए थे। यह सभी पुलिस कर्मी बर्खास्तगी के खिलाफ कोर्ट चले गए थे।
आईपीएस एसोसिएशन ने थी तत्कालीन सीएम शिकायत
मैनाठेर कांड में डीआईजी को हिंसक भीड़ के बीच छोड़ जाने के मामले में आईपीएस एसोसिएशन ने मुरादाबाद के तत्कालीन डीएम की शिकायत तत्कालीन मुख्यमंत्री से की थी।
मैनाठेर बवाल ने ले लिया था सियासी रूप
मैनाठेर बवाल ने सियासी रूप लिया था। बवाल के बाद ही पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने मैनाठेर जाने का एलान कर दिया था। वह अगले दिन दिल्ली से मैनाठेर जाने के लिए रवाना हो गए थे लेकिन पुलिस ने उन्हें गाजियाबाद में रोक लिया था। वह सड़क पर ही अपने समर्थकों के साथ बैठ गए थे। इसके अलावा मैनाठेर क्षेत्र की सीमाएं सील कर दी थीं। नेताओं के मैनाठेर थाने पर रोक लगा दी थी। कई दिन तक क्षेत्र में तनाव के हालत बने रहे थे।
तत्कालीन डीआईजी पर हमले में 16 लोग दोषी करार
मुरादाबाद जिले के करीब 15 साल पुराने बहुचर्चित मैनाठेर कांड में सोमवार को एडीजे-2 कृष्ण कुमार सिंह की अदालत ने फैसला सुनाया है। अदालत ने तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह पर हमले में 16 मुलजिमों को दोषी करार दिया है। इस मामले में चार आरोपियों की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है। अदालत 27 मार्च को दोषियों को सजा सुनाएगी।