इस दौरान उन्होंने कहा कि पुलिस ने धार्मिक पुस्तक का अपमान किया है। इस पर भीड़ भड़क गई और पुलिस और पुलिस के वाहनों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। पहले भीड़ ने मैनाठेर थाने को निशाना बनाया और वाहनों में आग लगा दी थी। किसी तरह पुलिस कर्मी अपनी जान बचाकर थाने की छत पर पहुंच गए थे लेकिन भीड़ ने छत तक पहुंचने का प्रयास किया था।
मैनाठेर थाना प्रभारी की गाड़ी भी फूंक दी थी। इसके बाद भीड़ ने मुरादाबाद से संभल जा रही पीएसी की गाड़ी को आग लगा दी और डींगरपुर पुलिस चौकी को भी निशाना बनाया। लगातार भीड़ बेकाबू होती जा रही हैं। इसके बाद मैंने डीआईजी को सूचना दी तो वह तुरंत मौके के लिए रवाना हो गए थे।
हालांकि मैंने उन्हें बताया कि यहां हालात बेकाबू हैं। पहले फोर्स भेज दें लेकिन भीड़ ने उन पर भी हमला कर दिया था। आस पड़ोस के जिलों की फोर्स बुलाई गई। इसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी हो पाई थी। डीआईजी अजय साहनी का मानना है अगर नेताओं ने भीड़ को नहीं उकसाया होता तो ऐसे हालात नहीं बनते।
डीजी ट्रेनिंग राजीव सभरवाल ने भी संभाला था मोर्चा, मैनाठेर में कई दिन किया था कैंप
डॉ. बीआर आंबेडकर पुलिस अकादमी के निदेशक एवं उत्तर प्रदेश पुलिस के डीजी ट्रेनिंग राजीव सभरवाल मैनाठेर बवाल के दौरान एटीएस के डीआईजी थे। मैनाठेर बवाल की गूंज शासन तक पहुंची तो तत्कालीन मुख्यमंत्री ने तेज तर्रार आईपीएस अफसरों की टीम का गठन किया।
राजीव सभरवाल के नेतृत्व में टीम बनाई और लखनऊ से स्पेशल चॉपर से मुरादाबाद भेजा था। डीजी राजीव सभरवाल ने बताया कि मैनाठेर में उस वक्त हालत बहुत खराब थे। छह जुलाई 2011 को बवाल हुआ था। सात जुलाई को हालात ठीक नहीं थे और आठ जुलाई को जुमा था लेकिन उस वक्त अधिकारियों और फोर्स ने बहुत मेहनत की थी। जिसका नतीजा था कि मैनाठेर को शांत कराने में सफलता मिली थीं।
थाने में फेंकी थी पर्ची, तब पेड़ के नीचे मिली थी डीआईजी की पिस्टल
तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह पर हमला कर उनकी नाइन एमएम की सर्विस पिस्टल लूट ली गई थी। 10 जुलाई 2011 को अमरोहा के डिडौली थाने में एक पर्ची फेंकी गई थी। जिसमें लिखा था कि असगरीपुर गांव के जंगल में बरगद के पेड़ के नीचे पिस्टल रखी है। पुलिस मौके पर पहुंची तो पॉलीथिन में डीआईजी की पिस्टल मिल गई थी।