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मैनाठेर कांड: नेताओं ने माइक से भड़काई थी भीड़, थाने और पीएसी वाहनों में लगा दी आग, डीआईजी की आंखों देखी

Fri, 27 Mar 2026 07:20 PM IST
Vimal Sharma अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद

सार

साल 2011 में मुरादाबाद के मैनाठेर थाना क्षेत्र के असालतनगर बघा गांव में हुए बवाल के पीछे नेताओं के भड़काऊ भाषणों की बड़ी भूमिका रही थी। यह दावा उस समय मुरादाबाद में प्रशिक्षु आईपीएस रहे और वर्तमान में बरेली रेंज के डीआईजी अजय साहनी ने किया। उन्होंने बताया कि नेता संयम से काम लेते तो हिंसा को टाला जा सकता था।
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Mainather kand - फोटो : अमर उजाला फाइल
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विस्तार
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मैनाठेर बवाल नेताओं के भड़काऊ भाषणों का भी नतीजा था। असालतनगर बघा गांव के सामने संभल-मुरादाबाद मार्ग पर जुटी भीड़ को पुलिस के खिलाफ भड़काया गया था। इससे भीड़ इतनी आक्रोशित हो गई थी और हर वर्दी वाले पर हमला करने लगे थे। यह कहना है कि बरेली रेंज के डीआईजी अजय साहनी का।

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वह उस वक्त मुरादाबाद में अंडर ट्रेनी आईपीएस थे और उन्हें कुंदरकी थाने का चार्ज भी दिया गया था। उन्होंने मैनाठेर बवाल पर चर्चा करते हुए बताया कि मैनाठेर थाना क्षेत्र के असालतनगर बघा गांव में पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी को दबिश दी थी। छह जुलाई 2011 की सुबह करीब आठ बजे आरोपी के परिवार ने साजिश के तहत हंगामा किया कि धार्मिक पुस्तक का अपमान करने का आरोप लगाया।

यह बात पूरे क्षेत्र में आग की तरह फैल गई थी। असालतनगर बघा गांव के सामने ही सैकड़ों लोग जुट गए थे। इसी दौरान मुरादाबाद और संभल के नेता और जनप्रतिनिधि भीड़ के बीच पहुंच गए थे। उनसे पहले ही लोग माइक लेकर वहां आए थे। संभल के एक नेता ने माइक हाथ में लिया और तकरीर देनी शुरू कर दी थी।

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इस दौरान उन्होंने कहा कि पुलिस ने धार्मिक पुस्तक का अपमान किया है। इस पर भीड़ भड़क गई और पुलिस और पुलिस के वाहनों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। पहले भीड़ ने मैनाठेर थाने को निशाना बनाया और वाहनों में आग लगा दी थी। किसी तरह पुलिस कर्मी अपनी जान बचाकर थाने की छत पर पहुंच गए थे लेकिन भीड़ ने छत तक पहुंचने का प्रयास किया था।

मैनाठेर थाना प्रभारी की गाड़ी भी फूंक दी थी। इसके बाद भीड़ ने मुरादाबाद से संभल जा रही पीएसी की गाड़ी को आग लगा दी और डींगरपुर पुलिस चौकी को भी निशाना बनाया। लगातार भीड़ बेकाबू होती जा रही हैं। इसके बाद मैंने डीआईजी को सूचना दी तो वह तुरंत मौके के लिए रवाना हो गए थे।

हालांकि मैंने उन्हें बताया कि यहां हालात बेकाबू हैं। पहले फोर्स भेज दें लेकिन भीड़ ने उन पर भी हमला कर दिया था। आस पड़ोस के जिलों की फोर्स बुलाई गई। इसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी हो पाई थी। डीआईजी अजय साहनी का मानना है अगर नेताओं ने भीड़ को नहीं उकसाया होता तो ऐसे हालात नहीं बनते।  

डीजी ट्रेनिंग राजीव सभरवाल ने भी संभाला था मोर्चा, मैनाठेर में कई दिन किया था कैंप
डॉ. बीआर आंबेडकर पुलिस अकादमी के निदेशक एवं उत्तर प्रदेश पुलिस के डीजी ट्रेनिंग राजीव सभरवाल मैनाठेर बवाल के दौरान एटीएस के डीआईजी थे। मैनाठेर बवाल की गूंज शासन तक पहुंची तो तत्कालीन मुख्यमंत्री ने तेज तर्रार आईपीएस अफसरों की टीम का गठन किया।

राजीव सभरवाल के नेतृत्व  में टीम बनाई और लखनऊ से स्पेशल चॉपर से मुरादाबाद भेजा था। डीजी राजीव सभरवाल ने बताया कि मैनाठेर में उस वक्त हालत बहुत खराब थे। छह जुलाई 2011 को बवाल हुआ था। सात जुलाई को हालात ठीक नहीं थे और आठ जुलाई को जुमा था लेकिन उस वक्त अधिकारियों और फोर्स ने बहुत मेहनत की थी। जिसका नतीजा था कि मैनाठेर को शांत कराने में सफलता मिली थीं।
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थाने में फेंकी थी पर्ची, तब पेड़ के नीचे मिली थी डीआईजी की पिस्टल
तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह पर हमला कर उनकी नाइन एमएम की सर्विस पिस्टल लूट ली गई थी। 10 जुलाई 2011 को अमरोहा के डिडौली थाने में एक पर्ची फेंकी गई थी। जिसमें लिखा था कि असगरीपुर गांव के जंगल में बरगद के पेड़ के नीचे पिस्टल रखी है। पुलिस मौके पर पहुंची तो पॉलीथिन में डीआईजी की पिस्टल मिल गई थी।

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