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Lok Sabha Elections: मुरादाबाद से एसटी हसन फिर मैदान में, बसपा ने संभल से सौलत को उतारा, दोनों को इसलिए टिकट

Mon, 25 Mar 2024 11:14 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद /संभल

सार

मुरादाबाद लोकसभा सीट से सपा ने वर्तमान सांसद एसटी हसन को फिर से मैदान में उतारा है। इस सीट पर टिकट को लेकर पार्टी के अंदर गहन मंथन हुआ था। इसके अलावा बसपा ने संभल सीट से सौलत अली को टिकट दिया है। दोनों सीटों पर बेहर रोचक गणित रहा है। 
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मुरादाबाद से एसटी हसन और सौलत अली - फोटो : अमर उजालाा
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विस्तार
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सपा ने मुरादाबाद सीट के लिए सांसद डॉ. एसटी हसन पर फिर भरोसा जताया है। वहीं, बसपा ने संभल संसदीय सीट के लिए मुरादाबाद देहात के पूर्व विधायक सौलत अली को मैदान में उतारा है। अलग-अलग दलों की रविवार को जारी हुई सूचियों के बाद मुरादाबाद और संभल सीट पर चारों प्रमुख दलों के उम्मीदवारों की तस्वीर साफ हो गई है।

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मुरादाबाद संसदीय सीट के लिए डॉ. एसटी हसन तीसरी बार चुनाव लड़ेंगे। इस बार भी उनका सामना भाजपा के सर्वेश सिंह से होगा। पिछले चुनाव में सर्वेश सिंह को हराकर ही वह संसद तक पहुंचे थे। इससे पहले 2014 के चुनाव में भाजपा के सर्वेश सिंह ने डॉ. हसन को शिकस्त देकर मुरादाबाद संसदीय सीट अपने कब्जे में की थी।

दूसरी ओर बसपा से संभल संसदीय क्षेत्र के उम्मीदवार बने सौलत अली का इस सीट पर यह पहला चुनाव है। 1996 में वह मुरादाबाद देहात सीट से सपा विधायक निर्वाचित हुए थे। 2012 के विधानसभा चुनाव में क्षेत्र और दल बदकर सौलत अली कुंदरकी से कांग्रेस के टिकट पर मैदान में आए थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली थी। 

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1996 में मुरादाबाद से सपा के टिकट पर सौलत अली बने थे विधायक

मुरादाबाद देहात क्षेत्र से सपा के टिकट पर विधायक रहे सौलत अली पर बसपा ने भरोसा जताया है। उनको संभल लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया गया है। 2012 में कांग्रेस के टिकट पर कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े और हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद वर्ष 2017 में पीस पार्टी के प्रत्याशी के रूप में मुरादाबाद देहात क्षेत्र से नामांकन कराया।

जो जांच में निरस्त कर दिया गया था। सौलत अली कांग्रेस से मुरादाबाद और संभल में किसी एक लोकसभा सीट से टिकट मांग रहे थे। सपा कांग्रेस का गठबंधन हुआ तो ये दोनों सीटें सपा के खाते में चली गईं। ऐसे में जब बसपा ने उनको संभल लोकसभा सीट से मौका दिया तो वो तैयार हो गए।

सौलत अली की राजनीतिक विरासत काफी लंबी है। उनके पिता रियासत हुसैन मुरादबाबाद देहात क्षेत्र से चार बार विधायक रहे हैं। वह पहली बार विधायक 1962 में बने थे। इसके बाद 1969, 1977 और 1980 में भी विधायक चुने गए थे। खास बात यह है कि 1977 और 1980 में सौलत अली के पिता रियासत हुसैन ने निर्दलीय चुनाव जीता था।

1986 में रियासत हुसैन का हार्टअटैक से निधन हो गया। पिता की राजनीति विरासत को संभालते हुए सौलत अली ने 1989 में पहला चुनाव मुरादाबाद देहात विधानसभा क्षेत्र से लड़ा और हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 1991 और 1993 में भी चुनाव हार गए।

वर्ष 1996 में सपा के टिकट पर चुनाव लड़े तो पहली जीत मिली थी। सौलत अली मूलरूप से मुरादाबाद के गांव सक्टू नगला के रहने वाले हैं, जो संभल लोकसभा क्षेत्र का ही हिस्सा है।

प्रत्याशी घोषित होने का इंतजार था। अब प्रत्याशी की घोषणा हो चुकी है। हमारी तैयारी पहले से है। चुनाव में पूरी ताकत से जुटना है। जिससे प्रत्याशी को भारी मतों से जीत मिल सके। -जितेंद्र सिंह, बसपा जिलाध्यक्ष, संभल

बसपा ने मुझ पर भरोसा जताया है और इस भरोसे को कायम रखा जाएगा। चुनाव लड़ने की तैयारी मेरी पहले से थी। मुझे पूरा यकीन है कि जनता का पूरा समर्थन मिलेगा। -सौलत अली, बसपा प्रत्याशी, लोकसभा क्षेत्र संभल

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अन्य दावेदारों पर भारी पड़े डॉ. एसटी हसन, सपा ने फिर जताया विश्वास

सपा ने अधिकृत तौर पर सांसद डॉ. एसटी हसन को लोकसभा चुनाव को लेकर मुरादाबाद से पार्टी का प्रत्याशी घोषित कर दिया है। एसटी हसन मंगलवार को अपना नामांकन दाखिल करेंगे। मुरादाबाद लोकसभा सीट से सपा का टिकट हासिल करने की दौड़ में कांठ के विधायक कमाल अख्तर, मुरादाबाद देहात के विधायक नासिर कुरैशी सहित अन्य लोग शामिल थे।

इस बीच सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव राय मशविरा करने के लिए सीतापुर जेल में बंद पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां से मिलने गए थे। पार्टी के लोगों का कहना था कि आजम खां से मिलने के बाद रामपुर और मुरादाबाद का टिकट पक्का हो जाएगा।

रामपुर से प्रत्याशी का तो अभी एलान नहीं हुआ है लेकिन रविवार को डॉ. एसटी हसन को मुरादाबाद से सपा का प्रत्याशी घोषित कर दिया गया। कानून गोयान क्षेत्र के रहने वाले सांसद डॉ. एसटी हसन 1990 ने सपा की सदस्यता ग्रहण की। इसके बाद पार्टी में बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष बनाए गए।

2006 में मेयर का चुनाव लड़े और भाजपा की प्रत्याशी बीना अग्रवाल को हराकर चुनाव में विजयी हुए। 2009 में सपा छोड़कर वह बसपा में चले गए थे लेकिन 2011 में सपा में फिर वापस आ गए। वर्ष 2014 में उन्होंने लोकसभा का चुनाव लड़ा लेकिन भाजपा के कुंवर सर्वेश सिंह से चुनाव हार गए।

2019 में फिर सपा से डॉ. एसटी हसन प्रत्याशी बनाए गए। सपा ने भाजपा के प्रत्याशी कुंवर सर्वेश सिंह को करीब एक लाख मतों से चुनाव हराया और डॉ. एसटी हसन सांसद चुने गए।

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