पीड़ित बच्चे के पिता ने 13 सितंबर 2017 को ठाकुरद्वारा थाने में केस दर्ज कराया था। उसने बताया था कि उसका आठ साल का बेटा मोहल्ले में अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। इसी दौरान कांशीराम कॉलोनी निवासी महमूद उसे टाफी दिलाने के बहाने अपने साथ जसपुर रोड की ओर ले गया और खेत में दुष्कर्म किया। बच्चे की चीख सुनकर रास्ते से गुजर रहे लोगों ने उसे महमूद की चंगुल से छुड़ाया था और आरोपी को भी पकड़ लिया था।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया था। इस मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश पॉक्सो कोर्ट रघुबर सिंह की अदालत में हुई। पीड़ित बच्चे और चश्मदीद ने अदालत में बयान दर्ज कराए, जबकि आरोपी का कहना था कि उसे रंजिश के चलते झूठा फंसाया गया। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद आरोपी को नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
कोर्ट ने 20 पेज में सुनाया फैसला
अदालत ने अपने 20 पेज के आदेश में महमूद को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। साथ ही उस पर 80 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। जुर्माना की धनराशि में से 75 प्रतिशत पीड़ित बच्चे को दी जाएगी। यदि दोषी जुर्माना अदा नहीं करता है तो तीन साल के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।