संभल के फिरोजपुर गांव में बना ऐतिहासिक पुराना किला
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मुगल बादशाह शाहजहां के दौर में संभल से करीब सात किलोमीटर दूर संभल-मुरादाबाद मार्ग पर सन् 1650-1655 के बीच संभल की सोत नदी के किनारे सैय्यद फिरोज ने किला बनवाया गया। फिरोजशाह, शाहजहां के शासनकाल में संभल क्षेत्र के गवर्नर रहे रुस्तमखां दक्खिनी के फौजी हुआ करते थे। उन्हें शाहजहां ने सोत नदी के किनारे संभल में एक हजार बीघा जमीन दी थी। उसी जमीन पर किला बनाया गया था, जिसे पुराना किला के नाम से जाना जाता है। वर्तमान में ये किला एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित है। किले का द्वार यहां आने वाले पर्यटकों को मुगलकालीन स्थापत्य कला की याद दिलाता है।
संभल नगर से तीन किलोमीटर दूर संभल-गवां मार्ग पर एक कब्र है। लोक मान्यता में ये कब्र तोता-मैना की मुहब्बत की निशानी के तौर पर प्रसिद्ध है। कब्र को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। संभल के इतिहास पर शोध करने वाले फुरकान संभली के मुताबिक उन्होंने कब्र पर लिखी इबारत पढ़ी है। इसमें एक तरफ आयतल कुर्सी लिखी है। एक तरफ दुआ और एक तरफ कब्र के बनने का समय हिजरी 939 लिखा हुआ है।
तोता-मैना की कब्र के करीब ही दर्शनीय स्थलों में प्रसिद्ध बावड़ी है। बावड़ी में लोग सीढ़ी से उतर कर नीचे तक जाते हैं। हालांकि, इस स्थान को संरक्षित करने की जरूरत है।
जामा मस्जिद संभल
जामा मस्जिद संभल के सबसे पुराने स्मारकों में से एक है। जामा मस्जिद वास्तुकला का नमूना और दर्शनीय स्थल है। ये मस्जिद पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।
वहीं संभल जिले के चंदौसी में पांच दशक से भव्य गणेश मेले का आयोजन किया जाता है। मेले को देखने के लिए देश-विदेश के लोग उत्सुक रहते हैं। हर साल तमाम विदेशी पर्यटक भी मेला देखने आते हैं। मेले में झांकियों के साथ निकलने वाली रथ यात्रा आकर्षण का केंद्र रहती है।