आरोपियों से मिलीभगत से एफआईआर दर्ज न करना 200
संज्ञेय अपराधों में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी गिरफ्तारी न करना 100
फरियादियों और पीड़ितों के साथ दुर्व्यवहार 75
अवकाश के बाद से गायब रहना 62
ड्यूटी प्वाइंट से गायब रहना 50
समय से चार्जशीट दाखिल न करना 30
अन्य आरोप 203
कुल आरोपी पुलिसकर्मी 720
सिपाही से इंस्पेक्टर तक सब पर जांच की आंच
जिन पुलिस कर्मियों के खिलाफ जांच चल रही है उनमें आरक्षी, मुख्य आरक्षी, उप निरीक्षक, और निरीक्षक भी शामिल हैं। जनपद में पुलिसकर्मियों की संख्या से औसत निकालें तो हर पांचवां पुलिसकर्मी जांच के दायरे में है। सबसे ज्यादा शिकायतें आरोपियों की गिरफ्तारी न करने के मामलों में हैं।
ज्यादातर मामलों में प्राथमिक रिपोर्ट में ही मिल जाती है क्लीनचिट
पुलिस कर्मियों के खिलाफ शिकायत मिलने पर अफसर पहले प्राथमिकी जांच कराते हैं। इस जांच रिपोर्ट से ही तय होता है कि पुलिस कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए या नहीं। विभाग का ही व्यक्ति जांच करता है। वह प्राथमिक रिपोर्ट में ही पुलिसकर्मी को क्लीनचिट दे देते हैं। ऐसे में आरोप लगने के बाद भी इन पुलिसकर्मियों को राहत मिल जाती है। जबकि शिकायत करने वाला न्याय के लिए भटकता रहता है।