सेतु निगम के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर आरके अग्रवाल पर नगर विकास मंत्री आजम खां ने अपना गुस्सा ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी तक फ्लाईओवर बनाने के बजाए पहले कोसी नदी के बंधे तक काम पूरा कराने पर उतारा। इस फ्लाईओवर को दो स्थानों पर उतारे जाने पर सहमति बनी थी, इसके लिए पुनरीक्षित आगणन शासन को भेजा गया। जिसे अभी मंजूरी नहीं मिली है। लेकिन सेतु निगम के इंजीनियरों ने पहले पुराने मैप जिसका बजट स्वीकृत था के अनुसार काम पूरा कर दिया था।
रामपुर में एकता चौराहे से जौहर विश्वविद्यालय तक फ्लाईओवर निर्माण को मार्च 2013 में स्वीकृति मिली थी और 12525.26 लाख रुपये मिले थे। सेतु निगम ने इस फ्लाईओवर का निर्माण नवंबर 2013 में शुरू किया। जौहर विश्वविद्यालय के पिछले गेट (कोसी नदी के बंधे तक) इसका निर्माण होना था। इस बीच किसी कारण विश्वविद्यालय का पिछला गेट बंद हो गया। लेकिन तब तक फ्लाईओवर के लिए 12 पिलर खड़े हो चुके थे।
नगर विकास मंत्री इस फ्लाई ओवर को अब विवि के पहले गेट तक कराना चाहते थे। लेकिन सेतु निगम के इंजीनियरों ने पुराने प्रस्ताव के मुताबिक निर्माण कर दिया। विश्वविद्यालय के पहले गेट तक इसी पुल के बीच से एक और रास्ता उतारे जाने का पुनरीक्षित आगणन बनाकर मुख्य अभियंता (सेतु निगम) को 15964.4 लाख का बनाकर भेज दिया। लेकिन इसे अभी शासन से स्वीकृति नहीं मिली है। इसकी स्वीकृति मिलने के बाद ही विश्वविद्यालय के पहले गेट तक फ्लाईओवर से दूसरा रास्ता बन सकेगा।
कोसी बंधे से एकता चौराहे तक दौड़ेगा ट्रैफिक
यह फ्लाईओवर एकता चौराहे से कोसी नदी के बंधे तक बना है। लालपुर डाम से बंधे पर सड़क बनाकर यदि इसे पुल तक जोड़ दिया जाए तो लालपुर से आने वाले लोगों को इस फ्लाईओवर का फायदा मिल सकेगा।
लालपुर बैराज का पुल भी अधर में
लालपुर बैराज पर खौंद-टांडा मार्ग पर कोसी नदी पर बनने वाले पुल का निर्माण भी अधर में लटका है। इसके लिए 1028.33 लाख रुपये की लागत से बनाया जाना है। यहां पुराने पुल को तोड़कर नया पुल बनाने में बाधा आ रही है। यदि पुराना पुल तोड़कर पुल बनाया जाता है तो पुल का पिलर नहर के बीच आ रहा है, इससे सिंचाई व्यवस्था चौपट हो जाएगी। सेतु निगम ने नए स्थान पर पुल बनाने की सहमति दी है। लेकिन कैबिनेट मंत्री आजम खां पुराने पुल के स्थान पर नए पुल का निर्माण कराना चाहते हैं।