मंडल में बडे़ पैमाने पर बेरोजगारों को नौकरी का झांसा देकर सऊदी अरब भेजा जाता है। लेकिन कई बार वहां जाकर युवाओं को पता चलता है कि उनके साथ धोखा हुआ है। कई युवा ऐसे भी हैं, जिन्होंने एसएसपी कार्यालय पहुंचकर पूर्व में शिकायतें की हैं। उनका कहना है कि वहां पर उनको बंधक बनाकर रखा जाता है। इसके एवज में उनसे रुपयों की मांग की जाती है।
रुपये मिलने के बाद कई युवा आरोपियों के बंधन से मुक्त होते हैं। वह प्लेसमेंट एजेंसी पर ठगों के संपर्क में होने का शक जताते हैं। इस संबंध में कई बार जनपद के अलग अलग थानों में एफआईआर भी दर्ज कराई जा चुकी है। अफगानिस्तान में मारे गए उमर के परिवार वालों ने खुफिया एजेंसियों को बताया है कि उमर भी नौकरी की तलाश में सऊदी अरब गया था, जिसके बाद वह कैसे आतंक की राह पर चल निकला?
इस संबंध में उन्होंने जानकारी से इंकार किया है। उमर सऊदी अरब कैसे गया था, उसको वहां जाने के लिए रुपये किसने मुहैया कराए। वीजा और पासपोर्ट किस तरह से बनवाए गए, इन सब सवालों के जवाब तलाशने में खुफिया एजेंसियां जुटी हैं, जिससे की आतंक के सरपरस्तों का पता चल सके।
समय समय पर खुफिया एजेंसियों ने मंडल में आतंकी गतिविधि में सक्रिय लोगों को गिरफ्तार कर इसका खुलासा किया है। मेरठ में पीएसी कैंप में हमले के आरोप में मुरादाबाद के कटघर में रहने वाले एक संदिग्ध को तीन साल पहले गिरफ्तार किया गया था, जबकि गुजरात में भाजपा नेताओं और आरएसएस से जुडे़ वरिष्ठ पदाधिकारियों की हत्या की साजिश के लिए कुवैत से भारत आए एक संदिग्ध को डेढ़ साल पहले मुरादाबाद में पहचान छिपाकर रहने के आरोप में मुगलपुरा पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
बिजनौर में एक घर में बम बनाते हुए विस्फोट होने पर भी आतंकियों के वहां छिपे होने का खुलासा हुआ था। अमरोहा में एनआईए की टीम ने पिछले साल आतंकी गतिविधि में संलिप्त बडे़ गिरोह का खुलासा किया था।
संभल में भी इसी तरह से पूर्व में आतंकी कनेक्शन सामने आ चुके हैं। जिस वजह से मंडल में खुफिया विभाग, दिल्ली की स्पेशल सेल, यूपी एटीएस की पैनी नजर हमेशा बनी रहती है। एजेंसियों की सतर्कता की वजह से कई वारदातें कई बार आतंक के सरपरस्त अपने मंसूबों में नाकामयाब हुए। कई बार बड़ी वारदातों को होने से बचाया भी जा चुका है।
कौन कौन से ग्रुप कर रहे काम
अब जासूसों के रडार पर ऐसी एजेंसियां हैं जो युवाओं को कबूतरबाजी या अन्य दूसरे तरीकों से बाहर भेजती है। सबसे ज्यादा सऊदी अरब ही युवा भेजे जाते हैं। उन्हें किस रोजगार के लिए भेजा जा रहा है, वास्तव में इस खेल की सच्चाई क्या है इस सब पर निगाह है। वहां काम कर लौटे युवकों पर भी निगाह है। कहीं वह दूसरे युवाओं को जोड़ने का काम तो नहीं कर रहे हैं। वास्तव में उन्हें वापस किसी मिशन पर लक्ष्य देकर तो नहीं भेजा गया है।