संभल के दीपासराय में रहकर शन्नू हाफिज हुआ और उसके बाद आगे की तालीम हासिल करने के लिए परिजनों से देवबंद जाने का आग्रह किया। जहां से उसको मौलवी डिग्री की तालीम हासिल करनी थी। पिता इरफान नहीं चाहते थे कि वह घर से कहीं दूर जाए क्योंकि वह परिवार में सबसे छोटा होने के नाते सबका लाडला था। पिता ने पहले मना किया था, लेकिन बाद में देवबंद भेज दिया।
यह समय था 1993 का जब शन्नू उर्फ मौलाना आसिम उमर देवबंद गया। 1998 में मौलवी की पढ़ाई हो चुकी थी। जब वह देवबंद से घर लौटा तो परिजनों से सऊदी अरब जाने की जिद की थी। लेकिन पिता ने सऊदी अरब भेजने से मना कर दिया था। वह सऊदी जाने के लिए एक लाख रुपये की मांग कर रहा था। जब ज्यादा जिद की तो पिता ने थप्पड़ मार दिया।
उसी थप्पड़ के बाद वह देवबंद चला गया और उसके बाद लापता हो गया। परिजनों को शुरूआती समय में लगा कि वह शायद कहीं से रुपयों का इंतजाम करके सऊदी अरब चला गया होगा। कई वर्ष इंतजार किया और तलाश भी की लेकिन कोई पता नहीं चला। 2008 में पहली बार मालूम हुआ कि शन्नू अब एक आतंकवादी बन गया है जो पाकिस्तान में रहता है।
जिसका नाम अब मौलाना आसिम उमर है। इसके बाद परिजनों ने उसके आने का इंतजार नहीं किया। शन्नू के बड़े भाई रिजवान उल हक बताते हैं कि उनका भाई पढ़ने में काफी होशियार था। लेकिन कैसे इस रास्ते पर चला गया यकीन नहीं होता।
जिस मोहल्ले में शन्नू ने अपना बचपन गुजारा है वहां उसके कई दोस्त हैं। बुजुर्ग बताते हैं कि उसको बचपन से ही धार्मिक तकरीर करना अच्छा लगता था। अक्सर वह धार्मिक आयोजनों में शामिल होता। धार्मिक बातों को अच्छे से बयान करता था। लेकिन उसकी तकरीर में कभी कोई ऐसी बात नहीं होती थी जिससे उसको कट्टरपंथी के तौर पर पेश करतीं।
अब जब उसके आतंकवादी संगठन का प्रमुख होने की बात लोग सुनते हैं तो हैरान हो जाते हैं। दरअसल शन्नू जिस परिवार से है वह शांत और शरीफ लोगों में शुमार होता है। मोहल्ले के ही नहीं आसपास के क्षेत्रों के लोग इज्जत करते हैं। शन्नू के बड़े भाई रिजवान हैं जो पेशे से अध्यापक हैं। दूसरे भाई एहतेशाम हैं सिविल इंजीनियर हैं और दिल्ली में परिवार के साथ रहते हैं।
शन्नू के पिता की मौत हो चुकी है। मां रूकय्या काफी बुजुर्ग हैं। वह बीमार रहती हैं। गुरुवार को स्थानीय खुफिया विभाग के कर्मचारी शन्नू के घर पहुंचे और उसके अफगानिस्तान में मारे जाने की जानकारी दी। स्थानीय पुलिस भी पहुंची। परिजनों ने एक सुर में कहा कि जब उनको दो दशक से कोई जानकारी नहीं तो उसके मरने-जीने से कोई फर्क नहीं पड़ता। वह उसकी मौत पर गमगीन नहीं हैं।
शन्नू उर्फ मौलाना आसिम के कुछ दोस्त भी खुफिया एजेंसी के आने पर उसके घर पहुंच गए। दोस्तों ने बताया कि शन्नू लगभग 21 वर्ष पहले लापता हुआ था। उस समय उसकी उम्र करीब 18 वर्ष रही होगी। कक्षा आठ तक पढ़ाई की। उसके बाद धार्मिक तालीम हासिल करने में लग गया। शन्नू के दोस्तों ने बताया कि वह बचपन में एक साथ क्रिकेट खेलते थे। शन्नू एक अच्छा तेज बॉलर था।
उसका सपना था कि वह देश के लिए बॉलिंग करे। लेकिन वह आतंकवाद के रास्ते पर चला गया, यकीन नहीं होता। दोस्तों के अनुसार शन्नू बेहद सीधे स्वभाव का था लेकिन खुफिया विभाग शन्नू को मौलाना आसिम उमर बताता है। जो मंगलवार को अफगानिस्तान में मारा गया है। इस बात से हैरानी होती है। शन्नू के दोस्तों ने उसके बुरे कदम पर अफसोस जाहिर किया। एक दोस्त की आंखों से आंसू निकल गए।
संभल में जन्मे दक्षिण एशिया अलकायदा का सरगना आसिम उमर ढेर होने के बाद एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों की निगाहें मुरादाबाद मंडल पर हैं। अमरोहा खुफिया तंत्र ने आतंकी आसिम उमर से संबंधित ब्योरा संभल पुलिस से मांगा है। हालांकि अभी तक आसिम का अमरोहा से कोई कनेक्शन सामने नहीं आया है।
मुरादाबाद मंडल में जन्मे कई युवकों को सुरक्षा एजेंसियों पूर्व में गिरफ्तार किया है। उनकी गतिविधियां आतंकी संगठनों के साथ जुड़ी पाई गईं थी। कुछ का नाम धार्मिक स्थलों पर हुए बम धमाकों से जुड़ा तो कई की भूमिका संदिग्ध पाई गईं। कई युवक जेल में बंद हैं। 26 दिसंबर 2018 को भी एनआईए और यूपी एटीएस ने संयुक्त रूप से छापा मारकर अमरोहा से संदिग्ध आतंकी मुफ्ती सुहैल समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया था। एनआईए ने उनके कब्जे से भारी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ मिलने का दावा किया था।
इस संबंध में एनआईए ने मुरादाबाद और संभल समेत कई ठिकानों पर छापे मारे थे। वहीं शुक्रवार को सुरक्षा बलों ने जम्मू कश्मीर के बारामूला में जैश-ए- मोहम्मद के संदिग्ध आंतकी मोहसिन सालेहा को गिरफ्तार किया था। मोहसिन सालेहा का अमरोहा से कनेक्शन होने की बात सामने आई। इसके बाद 24 घंटे तक शहर में एनआईए के छापों की अफवाहें उड़ती रहीं।
इसी बीच अमेरिका और अफगानिस्तान की संयुक्त कार्रवाई में संभल में जन्मे दक्षिण एशिया अलकायदा के सरगना आसिम उमर ढेर होने की खबर आ गई। इससे मुरादाबाद मंडल की पुलिस और खुफिया तंत्र में खलबली मच गई। स्थानीय खुफिया तंत्र ने भी आतंकी आसिम उमर का कनेक्शन खंगालना शुरू कर दिया। उसकी दोस्त-रिश्तेदारियों का पता लगाया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक आतंकी आसिम उमर का अमरोहा में कोई कनेक्शन नहीं हैं। उसका एक भाई दिल्ली में शिक्षक है। जबकि दूसरा संभल में रहता है। उसकी दो बहनें हैं जिनकी शादी संभल में ही हुई हैं। सूत्रों की माने तो आसिम उमर का असली नाम आसिम रजा उर्फ शनाउल हक है। परिजनों ने इसे पहचानने से इनकार कर दिया है। जबकि उसके पड़ोसियों ने उसके जैसे होने की बात कही है। वह 1998 में सऊदी अरब चला गया था। इसके बाद उसका कोई अता-पता नहीं था।