भारतीय सेना पाकिस्तान को करारा जवाब देने में सक्षम है। सीमा पर हमारे सैनिक अपने साहस का परिचय दे रहे हैं। एनसीसी को रक्षा की दूसरी पंक्ति कहा जाता है। कैडेट्स भी हर मुश्किल परिस्थिति के लिए तैयार हैं। - मेजर मीनू मेहरोत्रा
सरकार और सेना अपना काम बखूबी कर रही है। सेना को खुली छूट मिली है, जिसका नतीजा पाकिस्तान को भुगतना ही होगा। अब नागरिकों को अपना काम जिम्मेदारी से करने की जरूरत है। सोशल मीडिया की खबरों पर भरोसा न करें और मिलिट्री मूवमेंट की वीडियो पोस्ट न करें। - प्रो. आनंद कुमार सिंह, विभागाध्यक्ष रक्षा अध्ययन
हमारी सेना हर परिस्थिति से निपटने में सक्षम है। युद्ध की परिस्थितियों में एनसीसी कैडेट्स में भी गुस्सा और जोश भरा हुआ है। भारतीय सेना जल, थल व नभ में पूरी तैयारी और सतर्कता के साथ डटी हुई है। अपनी सेना के पास प्रशिक्षण, तकनीक, मनोबल और हथियार सब कुछ अधिक है। - कैप्टन डॉ. राजीव चौहान, सहायक प्रोफेसर
भारतीय सेना पाकिस्तान को करारा जवाब दे रही है। आम लोगों को नुकसान पहुंचाए बिना हम जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं। सेना के शौर्य पर पूरा भरोसा है। मैं सोचता हूं कि सुबह आंख खुले और खबर मिले कि पीओके में भारतीय सेना ने तिरंगा फहरा दिया है। - मेजर राजीव ढल
अब भी दुश्मनों को सबक सिखाने का जज्बा रखते हैं रिटायर्ड सूबेदार दयाल
26 सालों तक भारतीय सेना में तैनात रहे गोविंदनगर निवासी रिटायर्ड सूबेदार महेश्वर दयाल शर्मा अब भी दुश्मन को धूल चटाने का जज्बा रखते हैं। भारत-चीन युद्ध के समय 1962 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। 1988 में सेवानिवृत हुए सूबेदार महेश्वर दयाल शर्मा 1971 की भारत-पाकिस्तान जंग में कारगिल में लेह बार्डर पर तैनात रहे।
राजौरी सीमा पर देश की रक्षा के लिए सेवाएं दीं। अब उनकी उम्र 80 वर्ष है। 80 वर्ष की उम्र में भी देश के लिए जान की बाजी लगाने को तैयार हैं। जम्मू कश्मीर, कारगिल, असम सहित कई स्थानों पर तैनात रहे रिटा. सूबेदार शर्मा कहते हैं कि एक जवान मरते दम तक जवान ही कहलाता है।