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Moradabad News: इंसानी खून लगा मुंह...कहीं आदमखोर न बन जाए तेंदुआ

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मुरादाबाद। सोमवार को ठाकुरद्वारा के गांव लालापुर पीपलसाना में तेंदुए ने खेत पर काम कर रहीं संतोष देवी की जान ले ली थी। शरीर के कई हिस्सों को खा लिया था। वन विभाग के अफसरों का कहना है कि यदि कोई तेंदुआ इंसान का शिकार कर उसे भोजन के रूप में स्वीकार कर ले, तो उसके दोबारा हमला करने का खतरा काफी बढ़ जाता है। यही वजह है कि ऐसे मामलों में वन विभाग विशेष सतर्कता बरतता है और संबंधित तेंदुए की पहचान कर उसे पकड़ने का अभियान चलाता है।
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वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में तेंदुआ इंसानों से दूरी बनाए रखना पसंद करता है। अधिकांश हमले अचानक आमना-सामना होने, घिर जाने, शावकों की रक्षा करने या बच निकलने की कोशिश में होते हैं। लेकिन यदि किसी तेंदुए ने इंसान को मारकर उसका मांस खा लिया, तो वह इंसान को अपेक्षाकृत आसान शिकार के रूप में पहचान सकता है। ऐसी स्थिति में उसके उसी क्षेत्र में फिर से हमला करने की आशंका बढ़ जाती है।

वन विभाग की मानव-तेंदुआ संघर्ष प्रबंधन गाइडलाइन के अनुसार ऐसे तेंदुए को सामान्य वन्यजीव नहीं माना जाता। उसकी पहचान कर पिंजरे, कैमरा ट्रैप और विशेष निगरानी के जरिए पकड़ना प्राथमिकता होती है। ऐसे मामलों में पकड़े गए तेंदुए को दोबारा जंगल में छोड़ने की बजाय नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाती है, क्योंकि उसके दोबारा मानव पर हमला करने का जोखिम बना रहता है।
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डीएफओ डॉ. विनय कुमार का कहना है कि हर हमला आदमखोरी का मामला नहीं होता। कई घटनाएं अचानक आमना-सामना होने की वजह से होती हैं। इसलिए प्रत्येक घटना का वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण किया जाता है। कैमरा ट्रैप, पैरों के निशान, हमले के तरीके और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह तय किया जाता है कि संबंधित तेंदुए का हमला केवल रक्षात्मक था या उसने इंसान को शिकार बनाया। इसी आधार पर आगे की रणनीति तय की जाती है।



इस तरह शिकार करता है तेंदुआ
वन विभाग के मुताबिक तेंदुआ बेहद धैर्यवान और घात लगाकर हमला करने वाला शिकारी माना जाता है। वह पहले झाड़ियों, गन्ने के खेत या ऊंची घास में छिपकर शिकार की गतिविधि पर नजर रखता है। मौका मिलते ही पीछे या बगल से तेज छलांग लगाकर गर्दन या गले पर पकड़ बनाता है। कुछ ही सेकंड में शिकार को गिराकर उसका दम घोंट देता है। वह गर्दन के भीतर तक दांत गढ़ा देता है जिससे व्यक्ति की जगुलर वींस और कैरोटिड आर्टिरिक्स टूट जाती है। श्वसन नली खत्म हो जाती है और व्यक्ति की मौत हो जाती है। इसके बाद वह शिकार की खोपड़ी में पंजे धंसा कर गहरे जख्म बना देता है। इसके बाद वह शिकार को घसीटकर सुरक्षित स्थान पर ले जाता है, ताकि बिना किसी व्यवधान के भोजन कर सके।
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