बच्चों की देखभाल करने वाले स्टाफ की तैनाती भी कर दी गई है। जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों के अलावा डीएनबी की पढ़ाई कर रहे डॉक्टर 24 घंटे निगरानी के लिए रहेंगे। सांस लेने में परेशानी, डायरिया व संक्रमण के कारण गंभीर रूप से बीमार बच्चों को इस एचडीयू में रखा जाएगा। सभी बेड पर ऑक्सीजन कनेक्शन कराया गया है।
जंबो सिलिंडर के जरिये सप्लाई की व्यवस्था भी रखी गई है। एनएचएम से पांच नर्सिंग स्टाफ की नियुक्ति की गई है। जिला अस्पताल के चिकित्साधीक्षक डॉ. राजेंद्र ने बताया कि एचडीयू में उन बाल रोगियों को रखा जाएगा, जिन्हें नजदीक से निगरानी की जरूरत होगी। उन्हें आईसीयू की जरूरत नहीं होगी, लेकिन साधारण वार्ड की अपेक्षा ज्यादा स्वास्थ्य सुविधाओं की दरकार होगी। एचडीयू में वेंटिलेंटर के छोड़कर अन्य सभी सुविधाएं मिलेंगी। पल्स, हार्टबीट, बीपी आदि छोटी-छोटी निगरानी के लिए उपकरण लगाए गए हैं। वार्ड में शीशे के दरवाजे लगाने के साथ इसे वातानुकूलित बनाया गया है। एचडीयू में सिर्फ बाल रोगी की मां को जाने की अनुमति होगी। इसके अलावा यदि किसी को मिलना है तो उन्हें मास्क, शूज, कैप व अन्य नियमों का पालन करते हुए प्रवेश की अनुमति होगी।
बृहस्पतिवार को उद्घाटन के मौके पर अस्पताल की एसआईसी डॉ. संगीता गुप्ता, चीफ फार्मासिस्ट संदीप बडोला, अस्पताल प्रबंधक कुलदीप सक्सेना, रजनीश चौधरी आदि मौजूद रहे।