बहुचर्चित कांठ बवाल प्रकरण में सात साल तीन माह और 23 दिन सुनवाई के बाद अदालत ने मंगलवार को फैसला सुनाया। इस मामले में तत्कालीन डीएम, डॉक्टर, विवेचक, पूर्व थाना प्रभारी, चश्मदीद समेत 24 गवाहों ने अपने बयान अदालत में दर्ज कराए थे। केस में साठ आरोपी जेल भी भेजे गए थे। जिन्हें बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया था।
इस मुकदमे की सुनवाई 19 सितंबर 2014 को अदालत में शुरू की गई थी। उस समय मुरादाबाद में एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट नहीं थी। वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जनप्रतिनिधियों के मुकदमों का शीघ्र निस्तारण करने के लिए जिला स्तर पर स्पेशल कोर्ट बनाने का आदेश दिया था। जिसके बाद इस मामले की सुनवाई मुरादाबाद स्थापित की गई एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में की जाने लगी थी।
सात साल तीन माह और 23 दिन चले इस बहुचर्चित केस में अभियोजन पक्ष की ओर से 24 गवाह पेश किए गए, लेकिन कोई भी गवाह आरोप साबित नहीं कर पाया। बचाव पक्ष की ओर से जब जिरह की गई, तब गवाह घटना में आरोपियों की संलिप्तता साबित नहीं कर सके।
दोनों पक्षों सुनने के बाद अदालत ने 22 दिसंबर 2021 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। जिसे मंगलवार को सुनाया गया। अदालत ने अपने 58 पेज के आदेश में लिखा कि अभियोजन पक्ष किसी भी आरोपी की संलिप्तता को घटना में साबित नहीं कर सका। अदालत ने 74 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया है।