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सतर्क रहें, संक्रमितों के लिए हैप्पी हैपोक्सिया बन सकता है जानलेवा

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मुरादाबाद। कोरोना संक्रमण के मामलों में गिरावट आई है, लेकिन मौतें अब भी हो रही हैं। इसके पीछे चिकित्सकों ने हैप्पी हैपोक्सिया को भी एक कारण बताया है। चिकित्सकों का कहना है कि कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए हैप्पी हाइपॉक्सिया वह स्थिति है, जिसमें मरीज का ऑक्सीजन स्तर अचानक से कम होने लगता है और मरीज को पता भी नहीं चलता। मरीज को बेहोश होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया जाता है, लेकिन तब तक देर हो चुकी होती है।
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मुरादाबाद जनपद में पिछले एक सप्ताह से प्रतिदिन चार से पांच मौतें हो रही हैं। इनमें से कई ऐसे कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत हुई है, जब उनके परिजनों ने संबंधित मरीज को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया है और उसी दिन दो से चार घंटे बाद ही उस व्यक्ति की मौत हो गई है। प्रभारी आरआरटी सिविल लाइन डॉ. सुधीर चंद्र का कहना है कि होम आइसोलेशन वाले मरीजों को ज्यादा समस्या हो रही है। निर्धारित स्तर से नीचे ऑक्सीजन आने को ही हाइपोक्सिया कहते हैं। होम आइसोलेशन में मरीज ऑक्सीजन के सेचुरेशन को समझ नहीं पाते हैं। बहुत सी मौत सिर्फ इसी वजह से हो रही हैं कि कीमती समय को मरीज घर में बिता देते हैं। 90 ऑक्सीजन स्तर होने पर तुरंत अस्पताल जाने की जरूरत होती है। 94 से 85 फीसदी तक ऑक्सीजन होने पर यदि अस्पताल में भर्ती कराया जाए तो रिकवरी रेट अच्छा रहता है। 80 से नीचे ऑक्सीजन होने पर अस्पताल में भर्ती होने के बाद रिकवरी में देर लगती है, जबकि 70 फीसदी से कम ऑक्सीजन जाने पर मरीज को बचा पाना मुश्किल हो जाता है।
एकदम से पड़ती है वेंटिलेटर की जरूरत
चिकित्सकों का कहना है कि कोरोना संक्रमित मरीजों को हैप्पी हाइपोक्सिया की स्थिति में लगता है कि वह बिल्कुल ठीक है, लेकिन अचानक से उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत पड़ जाती है। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में आए कई मरीजों को इस स्थिति में पाया गया है जिसमें 80 से 70 के बीच में भी ऑक्सीजन जाने पर उन्हें कुछ पता ही नहीं चला था और अचानक से उनकी सांस फूलने लगी और उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत पड़ गई।
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ऑक्सीजन का स्तर 90 से नीचे आते ही हो जाएं सतर्क
चिकित्सकों का कहना है कि सामान्य व्यक्ति में ऑक्सीजन का स्तर 100 से 94 के बीच में रहता है। कोरोना संक्रमण होने पर ऑक्सीजन सेचुरेशन होने लगता है, लेकिन हैप्पी हाइपोक्सिया की स्थिति में मरीज को इसका आभास नहीं हो पाता। शरीर में ऑक्सीजन घटती रहती है और कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ता रहता है। फेफड़ों में सूजन आ जाती है और हिमोग्लोबिन की कमी होने लगती है। इसके कारण एक दम से सांस फूलने की समस्या होती है। इसीलिए मरीजों को हर दो घंटे पर ऑक्सीजन का स्तर चेक करते रहना चाहिए और 90 से नीचे आते ही उन्हें सतर्क हो जाने की आवश्यकता है।
क्या है हैप्पी हाइपोक्सिया
कोविड एल टू अस्पताल के इंचार्ज डॉ. प्रवीण शाह ने बताया कि अन्य किसी बीमारी में हाइपोक्सिया की स्थिति में मरीज को बेचैनी बहुत ज्यादा हो जाती है और वह अपने तीमारदारों से कह कर तुरंत अस्पताल में भर्ती हो जाता है, लेकिन कोरोना संक्रमित मरीजों में हाइपोक्सिया की स्थिति में उन्हें ऑक्सीजन की कमी की जानकारी ही नहीं होती है। इसे हैप्पी हाइपोक्सिया या साइलेंट हाइपोक्सिया कहते हैं। इसमें संक्रमित मरीज को बुखार, खांसी या सांस फूलने की समस्या नहीं होती है, लेकिन अचानक ऑक्सीजन का स्तर गिरने से मरीज की जान खतरे में पड़ जाती है। हाइपोक्सिया किडनी दिमाग और दिल पर असर डालती है। होम आइसोलेशन के मरीजों को सामान्य लक्षण का पता नहीं चल पाता है और ऐसी स्थिति में ऑक्सीजन का स्तर कई बार 70 तक पहुंच जाता है और ऐसे में मरीज को बचा पाना मुश्किल हो जाता है। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भी इस तरीके के कई मरीजों की मौत हुई है।
हाइपोक्सिया की ऐसे करें पहचान
कोरोना संक्रमित मरीज को हाइपोक्सिया की पहचान करने के लिए एक सांस में 30 तक गिनती गिननी है। यदि परेशानी आ रही है तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। हैप्पी हाइपोक्सिया के लक्षण छह से नौ दिनों के बीच में आते हैं। इस बीच छह मिनट तक लगातार मरीज टहलें और तत्काल ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन का स्तर चेक करें। यदि ऑक्सीजन का स्तर 94 से कम है तो उन्हें चिकित्सक से संपर्क करने की आवश्यकता है।
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