मुरादाबाद। कई बड़े शहरों में ई-बसों के संचालन का जिम्मा संभाल रही निजी कंपनी (पीएमआई) के अधिकारी हादसे के बाद जागे हैं। अभी तक मुरादाबाद सहित सात महानगरों में बिना प्रशिक्षण दिए चालकों से ई-बसें चलवाई जा रही थीं। 30 जनवरी को कानपुर में एक ई-बस का एक्सीडेंट हो गया था। जांच में स्पष्ट हुआ कि चालक अप्रशिक्षित था। नशे की हालत में बस चला रहा था।
इसके बाद जब परिवहन निगम मुख्यालय से कंपनी पर गाज गिरी तो आनन-फानन में सभी शहरों में बसों के संचालन पर अस्थायी रोक लगा दी गई। अब कंपनी ने चालकों का सत्यापन शुरू किया है। साथ ही कानपुर में उनकी ट्रेनिंग के लिए भी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। शुरुआत से काम में लेटलतीफी बरत रही कंपनी ने जल्दबाजी में चालकों को भर्ती किया था। अब गड़बड़ियां पाए जाने पर चालकों की कमी हो गई है। नतीजतन बुधवार को शहर में केवल दो बसों का संचालन हुआ, जबकि 14 फरवरी से पहले तक पांच ई-बसें शहर में दौड़ रही थीं।
यात्रियों की संख्या बढ़ने से प्रतिदिन की आय भी 20 हजार रुपये तक पहुंच गई थी। कंपनी की सुस्ती का दूसरा उदाहरण चार्जिंग डिपो पर देखा जा सकता है। 28 फरवरी तक शहर में 12 ई-बसें और पहुंचने का दावा किया जा रहा है। अब तक चार्जिंग डिपो पर सिर्फ एक चार्जिंग प्वाइंट तैयार है। इसके जरिये ही पांच बसों को चार्ज किया जा रहा था। वर्तमान स्थिति के अनुसार 28 फरवरी तक सभी पांच प्वाइंट्स चार्जिंग डिपो पर संचालित नहीं हो पाएंगे। ऐसे में ई-बसों की चार्जिंग के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ई-बस संचालन के नोडल अधिकारी और पीतलनगरी डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक शिवबालक का कहना है कि लोगों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। इसलिए निजी कंपनी को सभी ड्राइवरों का सत्यापन और प्रशिक्षण पूरा कराने के निर्देश मुख्यालय द्वारा दिए गए हैं। इसके बाद ही शेष तीन बसें शहर में दौड़ेंगी।