मुरादाबाद। गुरु तेग बहादुर साहिब के नाम पर लालबाग स्थित श्री गुरुतेग बहादुर गुरुद्वारा है। वह असम से आते वक्त 1670 में रामगंगा किनारे स्थित मुरादाबाद रुके थे। उन्होंने लोगों को गुरुनानक के सिद्धांतों का उपदेश दिया। तब से लेकर आज तक सिख मुरादाबाद में साल में दो बड़े कार्यक्रम करते हैं। एक कार्यक्रम गुरु तेग बहादुर साहिब के जन्म पर और दूसरा शहीदी दिवस पर होता है।
गुरु तेग बहादुर साहिब सिखों के नौवें गुरु हैं। वह भारत की यात्रा करने के दौरान असम से लौटते वक्त बिहार, वाराणसी, लखनऊ, बरेली होते हुए 1670 में मुरादाबाद पहुंचे थे। वह तीन दिन तक मुरादाबाद में रुके थे। उन्होंने मुरादाबाद में सिख समुदाय को एकजुट करने का काम किया। गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा प्रबंधक कमेटी के अनुसार 1940 में गुरु तेग बहादुर साहिब के नाम पर छोटी काली मंदिर के उत्तर में काली मंदिर प्रशासन के सहयोग से गुरु तेग बहादुर के भव्य गुरुद्वारे की स्थापना की गई। अब यहां पर समय-समय पर धार्मिक कार्यक्रम किए जाते हैं। कमेटी के अध्यक्ष जसप्रीत सिंह ने बताया कि लालबाग स्थित श्री गुरुतेग बहादुर गुरुद्वारा में हर मंगलवार को साप्ताहिक कार्यक्रम किया जाता है।
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नानक देव के दस सिद्धांत
1. ईश्वर एक है।
2. सदैव एक ही ईश्वर की उपासना करो।
3. जगत का कर्ता सब जगत और सब प्राणी मात्र में मौजूद है।
4. सर्वशक्तिमान ईश्वर की भक्ति करने वालों को किसी का भय नहीं रहता।
5. ईमानदारी से मेहनत करके उदरपूर्ति करना चाहिए।
6. बुरा कार्य करने के बारे में न सोचें और न किसी को सताएं।
7. सदा प्रसन्न रहना चाहिए, ईश्वर से सदा अपने को क्षमा शीलता मांगना चाहिए।
8. मेहनत और ईमानदारी से कमाई करके उसमें से जरूरतमंद को भी कुछ अंश देना चाहिए।
9. सभी स्त्री और पुरुष बराबर हैं।
10. भोजन शरीर को जिंदा रखने के लिए जरूरी है लेकिन लोभ-लालच न करें।
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पारकर इंटर कॉलेज में शहीदी दिवस पर कार्यक्रम आज
मुरादाबाद। गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा प्रबंधक कमेटी की ओर से मंगलवार को पारकर स्कूल में गुरु तेग बहादुर का 350 वां शहीदी दिवस मनाया जाएगा। पारकर इंटर कॉलेज के मेन प्ले ग्राउंड में विशेष कीर्तन समागम आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम शाम 6 बजे से रात 11 बजे तक चलेगा। सोमवार को गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभी के पदाधिकारियों ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। व्यवस्था में अध्यक्ष सरदार जसप्रीत सिंह, भगवान सिंह, तेजेंद्र सिंह, जगवीर सिंह, अमरजीत सिंह, स्वर्ण सिंह, गुरप्रीत दुआ, हर सेवक सिंह सहयोगी रहे।