कुंदरकी(रामपुर)। रामगंगा नदी के किनारे बसे अब्दुल्लापुर गांव के लोग सोमवार को जब पांच लोगों की शवयात्रा में शामिल होकर अंतिम संस्कार करने नदी के पास शमशान घाट पर पहुंचे तो अर्थी ले जाने वालों को एक किलोमीटर की पगडंडियों और खेतों के बीच होकर तय करनी पड़ी। आलम ये रहा कि लकड़ियों व उपलों से लदे ट्रैक्टर ट्राली को शमशान तक ले जाने के लिए चकरोड को रोटावेटर से समतल करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने दो बीघा शमशान घाट की भूमि और रास्ते को कब्जा मुक्त कराने की मांग उठाई। मौके पर मौजूद लेखपाल मोहम्मद फैजान ने आश्वस्त किया कि राजस्व अभिलेख के अनुसार शमशान घाट की भूमि और चकरोड को चिहिन्त कर समस्या को दूर किया जाएगा। मृतक संजू और मृतका सुमन के नाम पर कृषि भूमि है, जिनके आश्रितों को कृषक दुर्घटना बीमा योजना का लाभ दिलाने को रिपोर्ट आला अधिकारियों को दी जाएगी।
इससे पूर्व सपा विधायक हाजी मोहम्मद रिजवान ने मृतकों के घर जाकर परिजनों से मिलकर शोक संवेदन व्यक्त की। आजाद समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष सुमित कुमार, प्रदीप कुमार, आसिफ पाशा, जिला पंचायत अध्यक्ष पति डॉ ब्रजेश चौहान, एआईएमआईएम के नेता हाफिज मोहम्मद वारिस, जिपं सदस्य पति हाजी मोहम्मद रफी, रामभरोसे भारती, धर्मेंद्र लाठर सहित कई लोगों ने संवेदनाएं व्यक्त की।
आरती की शादी की तैयारी कर रहे थे परिजन
कुंदरकी। परिजन जल्द ही आरती की शादी करने की तैयारी में थी, उसके लिए रिश्ता तलाश कर रहे थे लेकिन उसकी मौत ने परिवार के सपनों को चकनाचूर कर दिया है।