जीएम ने रेलवे बोर्ड के निर्देशों का हवाला देकर टाला मंहगे किराये का मुद्दा
- पैसेंजर ट्रेनों में जारी है स्पेशल का टैग, शिकायतों के बावजूद जोनल स्तर पर नहीं किया जा रहा प्रयास
मुरादाबाद। कोरोना की पाबंदियां हटने के बाद भी मंडल में पैसेंजर ट्रेनों का संचालन स्पेशल का टैग लगाकर किया जा रहा है। इन ट्रेनों में यात्रियों से मेल एक्सप्रेस ट्रेनों की दर से किराया लिया जा रहा है। जीएम आशुतोष गंगल इस सवाल को टाल गए। पत्रकार वार्ता में उन्होंने किराए के लिए रेलवे बोर्ड पर निर्भरता व्यक्त की। निर्देशों के बाद ही संचालन सामान्य होने की बात कही।
ज्ञात हो कि जीएम रविवार को मुरादाबाद में निर्माणाधीन सोनकपुर ओवरब्रिज का निरीक्षण और रेलवे अस्पताल में नई मशीनों का उद्घाटन करने पहुंचे थे। पैसेंजर ट्रेनों के मंहगे किराये पर उन्होंने कहा कि ट्रेनों का संचालन एक जोन से दूसरे जोन में होता है। इसके चलते यह मामला जोनल स्तर से बाहर का है, रेलवे बोर्ड ही इस पर निर्णय लेगा। जबकि वास्तविकता यह है कि मुरादाबाद-रामनगर और मुरादाबाद-काठगोदाम पैसेंजर को छोड़कर सभी ट्रेनों का संचालन मुरादाबाद मंडल के भीतर हो रहा है। इसके बावजूद जोनल मुख्यालय किराया सामान्य करने पर कोई निर्णय नहीं ले रहा है। इस विषय पर यात्रियों की ओर से लगातार सुझाव मिल रहे हैं। ऐसे में जोनल रेलवे को एक पत्र रेलवे बोर्ड को भेजकर पैसेंजर ट्रेनों का किराया सामान्य करने की अपील करनी चाहिए।
इसके अलावा मेल स्पेशल ट्रेनों में एमएसटी, बुजुर्गों और दिव्यांगों को किराये में रियायत के लिए अभी और इंतजार करना होगा। रेलवे का कहना है कि व्यवस्थाएं धीरे धीरे सामान्य हो रही हैं। रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड मिलकर जल्द ही इस पर निर्णय ले सकते हैं। ज्ञात हो कि 23 मार्च 2020 के बाद से मेल एक्सप्रेस ट्रेनों में एमएसटी बंद है। बुजुर्गों, दिव्यांगों और खिलाड़ियों को किराये में रियायत भी नहीं मिल रही है।
यात्रियों की शिकायतों को अनदेखा किया जा रहा है। बहुत बड़ा तबका पैसेंजर ट्रेनों पर निर्भर है। बहुत से स्टेशनों के लिए जो किराया पहले 10 रुपये था, अब वह 30 रुपये लिया जा रहा है। अब कोरोना की पाबंदियां समाप्त हो गई हैं। रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड को यात्रियों के हितों का ध्यान रखना चाहिए।
- सुधीर पाठक, अध्यक्ष दैनिक रेल यात्री संगठन