सेल टैक्स की एसआईबी पब्लिक स्कूलों और बुकसेलर्स का गठजोड़ तोड़ेगी। शहर के कई बड़े बुकसेलर्स जांच के दायरे में आ गए हैं। एसआईबी के पास इन बुकसेलर्स की ओर से अभिभावकों को जारी बिल भी पहुंच चुके हैं। स्कूलों की ओर से बुकसेलर्स निर्धारित किये गए बुकसेलर्स का पर्चे भी एसआईबी तक पहुंच चुके हैं।
कुछ बड़े बुकसेलर्स की सूची एसआईबी ने तैयार की है। एसआईबी अफसराें की टीम गठित की जा रही हैं। अगले दो-तीन दिन में बुकसेलर्स के यहां छापे शुरू हो जाएंगे। खास बात यह कि अभिभावकों ने ही बुकसेलर्स का स्टिंग किया। स्कूलों से निर्धारित की गई दुकानों का पर्चा और बुकसेलर्स से मिले बिल एसआईबी तक पहुंचाए।
इन बिलों ओर पर्चों को आधार बनाकर एसआईबी ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। वाणिज्य कर अधिकारियों के अनुसार किताबें टैक्स फ्री हैं, किंतु एक्सरसाइज बुक, स्टेशनरी, बैग, कवर आदि टैक्स दायरे में आते हैं।
बुकसेलर्स किताबों की आड़ में कापियां, स्टेशनरी आदि को छिपाकर टैक्स बचाते हैं। एसआईबी के पास पहुंचे बिलों में एक बच्चे के बस्ते का बिल 4500-5000 रुपया तक है। इसमें सर्वाधिक दाम एक्सरसाइज बुक, स्टेशनरी, बैग आदि का है।
एक माह में 20 करोड़ रुपये का कारोबार
शहर में सीबीएसई बोर्ड के 35 और आईसीएसई बोर्ड के 5 पब्लिक स्कूल हैं। यह सभी मान्यता प्राप्त हैं। किसी स्कूल में छात्र छात्राओं की संख्या दो हजार तो कहीं एक हजार तक है। कहीं पर सात-आठ सौ छात्र छात्राएं पढ़ रहे हैं।
औसतन एक बच्चे का बैग पांच हजार रुपये में बन रहा है। एडमीशन के समय एक माह में करीब 20 करोड़ रुपये का कारोबार अकेले शहर के स्कूलों में कापी किताब, स्टेशनरी, स्कूल बैग आदि में हो रहा है।
पब्लिक सहयोग करे। स्कूलों से निर्धारित बुकसेलर्स के मिले पर्चे और बुकसेलर्स से मिले बिल वाणिज्य कर की एसआईबी को मुहैया कराएं। लोगों का नाम पता गुप्त रहेगा। इन बिलों और पर्चों के जरिये ही स्कूल और बुकसेलर्स पर टैक्स की कार्रवाई का शिकंजा कसा जा सकता है। मुरादाबाद मंडल के सभी जिलों में एसआईबी की टीमें लगाई जाएंगी। अभी तक मिले बिलों के जरिये उस स्कूल में छात्रों की संख्या के आधार पर जांच कराते हुए टैक्स और पेनाल्टी वसूली कराई जाएगी।
-डा. अजय गोयल एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-2 एसआईबी