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तनाव में वर्दीधारी, सात माह में चार पुलिस कर्मी कर चुके हैं आत्महत्या

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मुरादाबाद। जिन कंधों पर जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी है अब वही वर्दीधारी तनाव में हैं। मुरादाबाद में सात माह में चार पुलिसकर्मीं आत्महत्या कर चुके हैं । दो पुलिस कर्मियों ने कारबाइन से खुद को गोली मारकर जान दे दी जबकि एक सिपाही ने तमंचे से गोली मारकर आत्महत्या की। सोमवार को एक फालोवर ने फंदे पर लटक कर अपनी जान दे दी।
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मझोला के खदाना चौकी पर तैनात रहे सिपाही अंकुर बुलंदशहर के अब्बापुर के रहने वाले थे । अंकुर 2018 बैच का सिपाही था। उसने सात फरवरी को ही पड़ोसी गांव की युवती से प्रेम विवाह किया था। वह पत्नी के साथ किराये के मकान में रह रहा था। बताया गया था कि प्रेम विवाह करने के बाद से वह तनाव में था। उसने एक मार्च को तमंचे से खुद को गोली मारकर जान दे दी।
इसके अलावा चार जून को कटघर के आदर्श नगर में सिपाही मनीत प्रताप सिंह ने कारबाइन से खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली थी। बुलंदशहर के देहात कोतवाली क्षेत्र के रसूलपुर पिटारी गांव निवासी मनीत प्रताप की ड्यूटी सपा विधायक हाजी इकराम कुरैशी के गनर के तौर पर लगी थी। सिपाही प्रेमिका ने उस पर रेप का आरोप लगाते हुए गलशहीद में तहरीर दी थी। जिस वक्त मनीत ने आत्महत्या की थी। तब समय कमरे में सिपाही के साथ उसकी प्रेमिका भी मौजूद थी।
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इसके अलावा चौबीस सितंबर को पुलिस लाइन में हेड कांस्टेबल मजहर हुसैन ने कारबाइन से खुद को गोली मारकर आत्मत्या की थी। मजहर हुसैन अवकाश पर गए थे। घर से लौटने के बाद ही उन्होंने आत्महत्या कदम उठा लिया था। सोमवार को फालोवर ने पुलिस लाइन सभागार से सटी रसोई के स्टोर में फंदे पर लटक कर आत्महत्या कर ली। फालोवर ने सुसाइड नोट में लिखा है कि वह रोज रोज की बीमारी से तंग आ चुका है। फालोवर भी तनाव से गुजर रहा था।
पुलिस कर्मियों पर वर्क लोड अधिक होता है। परिवार के लिए समय कम है। कई बार पुलिस कर्मी अधिक वर्क की वजह से डिप्रेशन में आ जाते हैं। चिड़चिड़े हो जाते हैं। जो लोग ज्यादा भावुक होते हैं या पहले से बीमार होते हैं, कोई सहायता नहीं मिल पाती है तो वे आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। बीच बीच में पुलिस कर्मियों की काउंसलिंग होनी चाहिए। बीच बीच में छुट्टियां मिलनी चाहिए ताकि परिवार के समय दे पाएं। परिवार और परिचितों को भी ध्यान देना चाहिए कि कम सो पा रहे हैं या गुम रहने लगे हैं। बातचीत कम करने लगे हैं। इनसे सकारात्मक बातें करें। इनके अकेलेपन को दूर करें।
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डा. नीरज गुप्ता, मनोचिकित्सक
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