जिस जिला अस्पताल में मरीज सेहत ठीक करने की आस लिए आते हैं, उस जिला अस्पताल की अव्यवस्था ही उनकी हालत खराब किए दे रही है। टीबी और हाईपरटेंशन के मरीजों को सीढ़ियां चढ़कर तीसरी मंजिल पर इलाज के लिए जाना पड़ रहा है। कारण जिला अस्पताल की चारों लिफ्ट खराब पड़ी हैं। दिक्कत तब और बढ़ जाती है जब कोई बर्न पेशेंट आ जाता है। सीढ़ियों के सहारे जले हुए मरीज को तीसरी मंजिल पर ले जाने में पसीना छूट जा रहा है।
रोजाना अस्पताल के वार्डों में 80 से 90 मरीज भर्ती होते हैं। ये मरीज सीढ़ियों के रास्ते वार्ड तक पहुंच रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी तीसरी मंजिल के मरीजों को है, उन्हें 70 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। जिला अस्पताल की इमारत तीन मंजिला है। आईसीसीयू, इमरजेंसी और प्राइवेट वार्ड को छोड़कर सभी वार्ड अलग-अलग मंजिल पर है। इन वार्डों तक मरीजों को पहुंचने के लिए चार लिफ्ट लगाए गए हैं। लेकिन ये लिफ्ट मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए बेमतलब साबित हो रहे हैं। दो लिफ्ट महीने भर से खराब पड़े हैं। बाकी बचे दो लिफ्टों ने भी अब दगा दे दिया है। दोनों पिछले एक हफ्ते से खराब हैं। पहली और दूसरी मंजिल के मरीजों का तो किसी तरह काम चल जाता है, लेकिन तीसरी मंजिल के मरीजों को 70 सीढ़ियां चढ़नी उतरी पड़ती है। हाल तक है जब थर्ड फ्लोर पर गंभीर मरीजों के वार्ड और सेंटर हैं।
तीसरी मंजिल पर चलने वाले सेंटर
एआरटी सेंटर : यहां एचआईवी के मरीज आते हैं। रोजाना करीब 40 मरीजों का आना होता है
ओएसटी सेंटर : यहां इंजेक्शन से नशा करने वाले मरीज आते हैं। रोजाना 60 मरीज आते हैं
एनसीडी सेल : यहां हार्ट, शुगर, बीपी और हाइपरटेेेंशन के मरीज इलाज कराने आते हैं, प्रतिदिन औसतन 50 मरीज आते हैं
टीबी डीआरबी सेंटर : इस सेंटर में टीबी के एमडीआर मरीज आते हैं, औसतन रोजाना 4 से 5 मरीज भर्ती किए जाते हैं
25 से 30 साल पुराने हैं लिफ्ट
मुरादाबाद। जिला अस्पताल में कुल छह लिफ्ट लगे हैं। इनमें चार मरीजों के लिए और दो दफ्तर के लिए है। लेकिन सभी लिफ्ट जर्जर हालत में हैं। ये लिफ्ट करीब 25 से 30 साल पुराने हैं। अनुबंधित कंपनी का अता पता भी नहीं है।