ठेकेदार के स्टाफ व रेलवे की इंजीनियरिंग टीम ने पुराने पुल के ढांचे को खोल दिया है। कुछ हिस्सा जेसीबी की मदद से हटाया गया है। इसी बीच मंडलीय अधिकारियों ने मुख्य लाइन पर ब्लॉक लेने के लिए रेल मुख्यालय को प्रस्ताव भेज दिया है। बुधवार तक इसके लिए अनुमति मिल सकती है। डीआरएम राजकुमार सिंह का कहना है कि मुरादाबाद मंडल मुख्यालय होने के साथ-साथ ट्रेनों के आवागमन के लिहाज से बड़ा स्टेशन है। यहां से 150 से ज्यादा ट्रेनें गुजरती हैं, हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना न करना पड़े, इसलिए काफी विचार-विमर्श के बाद ब्लॉक की प्लानिंग की गई है।
रेल प्रशासन ने कोशिश की है कि कम से कम ट्रेनें निरस्त हों या उनका मार्ग बदला जाए। रेल प्रशासन का दावा है कि तीन माह के भीतर नया पुल तैयार कर लिया जाएगा। इसके बाद पहले की तरह यहां से दोपहिया वाहन गुजर सकेंगे। चार दिसंबर 2022 से पुराना पुल दोपहिया वाहनों के लिए बंद है।
60 साल में तीसरी बार बन रहा है पुल
कपूर कंपनी पुल 60 साल में तीसरा बार बन रहा है। वर्तमान में जिस पुल को गिराया जा रहा है, वह 1995 में बना था। महज 27 साल में जर्जर हो गया। इसके बाद रेलवे के तत्कालीन इंजीनियरों पर सवाल भी उठे। नगर विधायक रितेश गुप्ता ने रेल प्रशासन से मिलकर जांच की मांग की थी, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया। बरसात के पानी की निकासी न होने से वर्तमान पुल की निचली सतह का कमजोर हो गई थी। इसके बाद आईआईटी रुड़की की टीम ने इसे दोपहिया वाहनों के लिए बंद करने की सलाह दी थी। रेलवे का दावा है कि नया पुल ज्यादा मजबूत व टिकाऊ बनाया जा रहा है। 170.9 मीटर लंबे व तीन मीटर चौड़े पुल के लिए 7.10 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।