वीरपुर बरियार में तीन महीने में चार बच्चों की मौत से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। मुरादाबाद से लेकर लखनऊ तक मामला गूंज उठा। डॉक्टरों की टीम ने सोमवार को गांव में डेरा डाल दिया। आधी-अधूरी तैयारी के साथ पहुंची टीम के पास थ्रोट स्वाब कलैक्टिंग स्टिक तक नहीं थीं।
गांव में संभावित गलाघोंटू के तीन बच्चे मिलने पर ‘लकड़ी के तीर’ से उनके थ्रोट सैंपल लिए गए। कलैक्ट सैंपल को जांच के लिए संचारी रोग संस्थान दिल्ली भेजा गया है। वहीं बुखार पीड़ित तेइस मरीजों की स्लाइड बनाई गई है। उधर, इस मामले में शासन स्तर से भी सीएमओ से पूछताछ की गई।
पिछले तीन में महीनों में मूढ़ापांडे पीएचसी के वीरपुर बरियार में चार बच्चों की मौत हो चुकी है। जांच न होने से किसी भी मौत की स्पष्ट वजह सामने नहीं आ सकी। सोमवार को मूढ़ापांडे पीएचसी की टीम गांव में पहुंची। लेकिन आधी अधूरी तैयारी के साथ। प्रधान के घर शिविर लगाकर मरीजों का इलाज किया गया। शिविर में पहुंचे 376 मरीजों की सेहत की जांच की गई।
तेइस मरीज बुखार से पीड़ित मिले। संदेह होने पर इन मरीजों की स्लाइड तैयार की गई। जबकि बाकी सामान्य सर्दी जुकाम, स्किन जैसी बीमारियों से पीड़ित पाए गए। वहीं तीन बच्चों में गलाघोंटू के लक्षण मिले। इनके सैंपल लेने के लिए टीम के पास थ्रोट स्टिक नहीं थी।
आननफानन में बांस की लकड़ी को स्टिक बना दिया। जिसे बच्चों जमशेद, अफजल और सलमान के मुंह के रास्ते गले में डालकर सैंपल कलैक्ट किया गया। इस दौरान प्रधान प्रतिनिधि महफूज अली चौधरी, डॉ. अनीस, डॉ. प्रदीप दिवाकर, फार्मेसिस्ट सुदेश चौधरी, एलटी पंकज, एएनएम कंचन वर्मा, दानवीर मौजूद रहे।
वीरपुर बरियार में चार बच्चों की मौत तीन महीने में हुई है। गांव में डॉक्टरों की टीम भेजकर स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया है। तीन बच्चों का थ्रोट सैंपल भी लिया गया। मरने वाले बच्चों की कोई जांच नहीं हुई थी, इसलिए मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है।
-डॉ. संजीव यादव, सीएमओ