नीलम सिंह, मुरादाबाद। शहर के तीन स्थानों से लिए गए पेयजल के सैंपलों की जांच कराई तो इनमें खतरनाक धातुओं के कण मिले हैं। ये धातुएं कैंसर जैसी बीमारी का कारण बन सकती हैं। अब यह रिपोर्ट लखनऊ भेजी जाएगी। प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर (पीएस) का कहना है कि इन धातुओं का पेयजल में मिलना मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है।
हिंदू कालेज की प्रदूषण पारिस्थितिक शोध प्रयोगशाला के शोधार्थियों ने अगस्त माह में मुगलपुरा, डिठौरा तथा बरबलान क्षेत्रों से पेयजल के सैंपल लिए थे। ये सैंपल प्रोजेक्ट काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलाजी (सीएसटी) के प्रोजेक्ट के तहत लिए गए थे। प्रिंसिपल इन्वेस्टगेटर (पीआई) डॉ. अनामिका त्रिपाठी के के मुताबिक अंजू चौहान, अतुल कुमार, प्रियंका सिंह, भोपाल सिंह, अजय कुमार, अमरीश कुमार ने ये सैंपल उठाए थे। दिल्ली की एक अधिकृत प्रयोगशाला में इन नमूनों का परीक्षण कराया गया। उन्होंने बताया कि एक नल से तीन बोतल में सैंपल लिए थे। तीनों के परीक्षण के बाद यह औसत वैल्यू निकाली है। नमूनों की जांच में चौंकाने वाले परिणाम आए हैं। यहां के पानी में पारा, कैडमियम, क्रोमियम, लेड और अन्य आर्सेनिक, कार्सोजैनिक धातुएं मिली हैं।
ई कचरा बना है कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि ई कचरे के कारण इस क्षेत्र के पानी में यह असर आया है। यहां ई कचरा जलाकर या तो उसकी राख बहाई जा रही है या फिर उसे दबाया जा रहा है। ई कचरे को लेकर इस समय प्रशासन भी सख्ती कर रहा है।
असाध्य रोगों का बन सकता है कारण
चिकित्सकों के मुताबिक लगातर ऐसे पानी के प्रयोग से किडनी का कैंसर, अल्सर आदि हो सकता है। इसके अलावा एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मस्तिष्क और किडनी खराब होना, कैंसर आदि बीमारियां होती हैं। यह खतरनाक धातुएं हैं, जो वातावरण में नहीं होनी चाहिए। कापर, निकिल, जिंक से सांस लेने में दिक्कत होती है, जिससे टीबी, अस्थमा, सीओपीडी, ब्रोंकाइटिस आदि हो सकता हैैं। वहां के लोगों का आईसीएमआर (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) की डॉ. रंजना चौधरी के नेतृत्व में स्वास्थ्य परीक्षण भी करवाया गया है। उसकी रिपोर्ट दिसंबर माह तक आने की उम्मीद है। उसमें रक्त, नाखून और बालों के सैंपल लिए गए हैं।
मिली धातु मुगलपुरा बरबलान डिढौरा अधिकतम मात्रा न्यूनतम मात्रा
पारा 2.13 1.02 -- 0.1 नहीं होना चाहिए
लेड .542 .411 .005 1.9 नहीं होनी चाहिए
निकिल .549 .324 .004 14 ट्रैसिज
क्रोमियम .229 .188 .005 --- नहीं होनी चाहिए
जिंक .650 .485 .010 160 ट्रैसिज
कैडमियम .001 .001 .001 .5 नहीं होनी चाहिए
कापर .128 .095 .007 5 ट्रैसिज
(धातु माइक्रोग्राम प्रति लीटर है)
वर्जन...
कई एंजाइम्स में कापर और जिंक होता है। यह सूक्ष्म कण हैं, जो बहुत कम मात्रा में होती है। इसकी न्यूनतम सीमा निर्धारित नहीं है पर अधिकतम है। मर्करी, लेड, आर्सेनिक बहुत नुकसान करते हैं। जहां से सैंपल लिए हैं, वहां के बाशिंदों का स्वास्थ्य परीक्षण होना चाहिए, ताकि शरीर में इन धातुओं की मात्रा की पता चल सके।
डॉ. नितिन बत्रा, वरिष्ठ फिजिशियन।