नई जेल के निर्माण की सबसे बड़ी बाधा दूर हो गई है। कारागार के लिए किसान 40 हेक्टेयर भूमि देने को तैयार हो गए हैं। इसके लिए जिला प्रशासन और किसानों के बीच एग्रीमेंट हो गया है। अगले दो - तीन दिन में रजिस्ट्री का काम भी निपटा लिया जाएगा। जिला जेल आबादी के अंदर आ चुकी है। अंग्रेजों के दौर में बनी जिला जेल सवा सौ साल से भी अधिक पुरानी है। इसकी क्षमता महज 517 बंदियों की है। लेकिन फिलहाल मुरादाबाद जेल में 3100 से ज्यादा बंदी हैं।
जिसकी वजह से जेल की बैरकों में बंदियों को लेटना तो दूर बैठने तक की जगह नसीब नहीं है। पूरी - पूरी रात बंदी खड़े होकर गुजारने को मजबूर हैं। जेल में बंदियों की दुर्दशा को देखते हुए पिछले डेढ़ दशक से नई जेल को लेकर कवायद चल रही थी। लेकिन जमीन को लेकर हर बार मामला अटक जाता था। रामपुर रोड पर जीरो प्वाइंट पर भदासना हवाई पट्टी के पास नई जेल प्रस्तावित थी। लेकिन पिछले दस सालों में जिला प्रशासन जमीन नहीं खरीद पाया था।
डीएम जुहैर बिन सगीर ने सिरसखेड़ा गांव में कैंप लगवाकर किसानों से संपर्क साधा तो किसान एक - एक करके जमीन देने को राजी हो गए। जेल निर्माण के लिए शासन से 39.44 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। जमीन मिलने के बाद अब जेल निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। जीरो प्वाइंट के पास प्रस्तावित नई जेल के लिए चालीस हेक्टेयर भूमि की जरूरत थी। इसके लिए किसान तैयार हो गए हैं और जिला प्रशासन व किसानों के बीच इस बाबत एग्रीमेंट भी हो चुका है।
अब रजिस्ट्री का काम शुरू किया जाएगा। रजिस्ट्री शुल्क के लिए 27 लाख रुपये की कमी पड़ रही थी, जिसकी डिमांड मंगलवार को हुई वीडियो काफ्रेंसिंग में की गई है। प्रमुख सचिव ने आश्वासन दिया है कि जल्द यह रकम शासन से मिल जाएगी। - जुहैर बिन सगीर, डीएम।