पूर्व सांसद जयाप्रदा के खिलाफ 2019 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान स्वार और केमरी थाने में आचार संहिता उल्लंघन के दो मामले दर्ज किए गए थे। यह दोनों मामले इस वक्त कोर्ट में विचाराधीन हैं। एक मामले में अभियोजन की गवाही पूरी होने के बाद पूर्व सांसद के बयान दर्ज होने थे, जबकि दूसरे मामले में गवाही चल रही थी, लेकिन वह कोर्ट में पेश नहीं रही थी। जिस पर जिस पर कोर्ट ने पूर्व सांसद के खिलाफ सात दफा गैर जमानती वारंट जारी किए साथ ही जमानतियों की पत्रावलियों को खोल दिया गया था।
27 फरवरी को कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए उन्हें फरार घोषित कर दिया था, साथ ही पुलिस को आदेश दिए थे कि जयाप्रदा को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाए। इसके लिए पुलिस क्षेत्राधिकारी के नेतृत्व में टीम गठित की जाए। जिस पर 4 मार्च को जयाप्रदा ने कोर्ट में सरेंडर किया था और अपने खिलाफ चल रहे गैर जमानती वारंट को निरस्त करने की मांग की थी। कोर्ट ने सुनवाई के बाद वारंट रिकॉल किया था।
इस मामले की सुनवाई बुधवार को कोर्ट में हुई पूर्व सांसद जयाप्रदा कोर्ट में पेश हुई और उन्होंने अपने धारा 313 सीआरपीसी के तहत अपने ब्यान दर्ज कराए। उन्होंने अपने बयानों में कहा कि मैंने कोई अपराध नहीं किया है और पुलिस ने झूठा मुकदमा दर्ज कराया है, मेरे खिलाफ कोई सबूत नहीं है। न्यायालय का मैं सम्मान करती हूं और मैं अदालत से नहीं भाग रही हूं। मैं बीमार थी, इसलिए नहीं पहुंच पा रही थी। जयाप्रदा के अधिवक्ता प्रवीन कुमार ने बताया की पूर्व सांसद जयाप्रदा के थाना स्वार में दर्ज मुकदमे में धारा 313 सीआरपीसी के तहत ब्यान दर्ज हुए हैं इस मामले की अगली सुनवाई 22 मार्च को होगी।