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आदर्श कॉलोनी की बदनाम गलियां: पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन धंधा नहीं... यहां सात दशक से कच्ची शराब का सिंडीकेट

Fri, 20 Sep 2024 01:55 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद

सार

मुरादाबाद में शराब पीने से हालत बिगड़ने के बाद एक-एक कर तीन दिनों में पांच लोगों की मौत होती गई। लेकिन पुलिस अनजान बनी रही। अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए तैनात आबकारी विभाग अधिकारियों और कर्मचारियों को भी इसकी भनक तक नहीं लगी।
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शराब पीने से पांच लोगों की मौत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नाम आदर्श कॉलोनी लेकिन इसकी गलियां सालों से कच्ची शराब के धंधे के लिए बदनाम हैं। यहां की पीढि़यां तो बदलती गई मगर इस धंधे को बंद नहीं किया। पुलिस ने सख्ती करने के साथ ही इन्हें रोजगार से जुड़ने का भी हर संभव प्रयास किया। तत्कालीन एसएसपी ने रोजगार मेला लगवाया और योग्यता के हिसाब से उन्हें रोजगार भी दिलवाए लेकिन कोई एक माह तो कोई दो माह में ही नौकरी छोड़कर फिर से इसी धंधे में लिप्त हो गया। इतना नहीं कई लोग तो सरकारी नौकरी तक छोड़ आए।

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मुरादाबाद के सिविल लाइंस क्षेत्र में आने वाली आदर्श कॉलोनी में 1950 से पहले से कच्ची शराब का धंधा पनप रहा है। यहां के पढ़े लिखे लोगों ने शराब में लिप्त परिवारों को निकालने की कोशिश की लेकिन वह भी कुछ ही परिवार को निकाल पाए। हालात ऐसे होते गए कि साल दर दर शराब बनाने की तस्करी का धंधा पनपता चला गया। पुरुषों के साथ ही महिलाएं भी इस धंधे में शामिल होती चली गईं। मुरादाबाद के अलावा आसपास के गांवों और जिलों में आदर्श कॉलोनी में बनने वाली शराब की आपूर्ति की जाती है।

पुलिस सुबह शाम कॉलोनी में दबिश देती है लेकिन इस धंधे को पूरी तरह से बंद करने में अब तक सफल नहीं हो पाई है। शराब का धंधा तो यहां बंद नहीं हो पाया। चौकी इंचार्ज और थाना प्रभारी जरूर दंड झेलते रहे। चार साल पहले तत्कालीन एसएसपी अमित पाठक ने शहर के नियार्तक, कारोबारी और कई कंपनियों से बात की। इसके बाद इस कॉलोनी में रोजगार मेला लगाया गया। शराब के धंधे में लिप्त लोगों से कहा गया कि वह शराब का धंधा छोड़ दें। उन्हें नौकरियां दी जाएंगी। रोजगार मेले में एक हजार से ज्यादा लोगों को नौकरियां दी गईं। इसमें महिलाएं और युवतियां भी शामिल थी लेकिन सभी नौकरियां छोड़कर फिर से इसी धंधे में लिप्त हो गए। यहां बनने वाली शराब की तस्करी दूसरे मोहल्लों में करने लगे।

आबकारी का दावा, शराब से नहीं फूड प्वाइजनिंग से हुईं मौतें
शराब पीने से पांच लोगों की मौत के मामले को आबकारी विभाग ने खारिज कर दिया। अधिकारियों का दावा है कि इन पांचों की मौतें शराब पीने से नहीं हुईं हैं। सभी ने एक साथ कई दिन पुराना चिकन खाया था। फूड प्वाइजनिंग में सभी ने जान गंवाई है। यहां सवाल यह उठता है तक जब शवों का पोस्टमार्टम नहीं हुआ तो फूड प्वाइजनिंग की पुष्टि कैसे हो गई।

दीपू उर्फ संदीप ने अपने ममेरे भाई विक्की के साथ आदर्श कॉलोनी में शराब पी थी। इनके साथ चंद्रपाल, सुंदरपाल और महेश भी मौजूद थे। पुलिस और आबकारी विभाग की जांच पड़ताल में शराब पीने और चिकन खाने की बातें सामने आई हैं लेकिन आबकारी विभाग का मानना है कि शराब पीने से मौत नहीं हुई है। जिला आबकारी अधिकारी महेंद्रपाल ने बताया कि जांच में पता चला कि पांचों ने पुराना चिकन खाया था। जिससे उनकी मौतें हुई हैं।

मुरादाबाद में शराब पीने से हालत बिगड़ने के बाद एक-एक कर तीन दिनों में पांच लोगों की मौत होती गई। लेकिन पुलिस अनजान बनी रही। अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए तैनात आबकारी विभाग अधिकारियों और कर्मचारियों को भी इसकी भनक तक नहीं लगी। इस बीच मीरपुर में मौतों का सिलसिला जारी रहने के बावजूद आदर्श कॉलोनी में लोग शराब पीने जाते रहे। इससे परेशान महिलाएं आगे आई, तब पुलिस अलर्ट हुई और जांच पड़ताल शुरू की गई। 

शहर की मिलन विहार कॉलोनी से सटे मीरपुर निवासी सुंदरलाल, विक्की, महेश, प्रीत विहार निवासी चंद्रपाल और भोगपुर मिठौनी निवासी संदीप उर्फ दीपू ने शनिवार की रात आदर्श कॉलोनी में शराब पी थी। इसके बाद से पांचों की धीरे धीरे हालत बिगड़नी शुरू हो गई। सबसे पहले चंद्रपाल की हालत बिगड़ी। उन्हें उल्टियां शुरू हुई। इससे परिवार के लोग परेशान हो गए और एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल चंद्रपाल को लेकर दौड़े। लेकिन उसकी जान नहीं बच पाई। यही हालत बाकी चारों लोगों के साथ भी हुई। 

रविवार से लेकर मंगलवार रात पांचों ने दम तोड़ दिया। एक शव का अंतिम संस्कार किया गया तो दूसरे की हालत बिगड़ गई। इससे आदर्श कॉलोनी में हड़कंप मच गया। प्रीत विहार, मीरपुर, कांशीराम नगर समेत आसपड़ोस की कई कॉलोनी में महिलाओं ने अपने बेटे और पति को आदर्श कॉलोनी से जाने से लोग लगाने की कोशिश की। लेकिन कुछ लोग फिर भी नहीं माने। परिवार की पाबंदी के बावजूद उन्होंने आदर्श कॉलोनी जाना बंद नहीं किया।

पांच मौतें होने के बाद पुलिस को इसकी कोई भनक नहीं लग पाई। जबकि मौतें किसी गांव में नहीं बल्कि शहर की कॉलोनी में हुई थीं। बावजूद इसके न तो आबकारी विभाग अलर्ट हुआ और न ही खुफिया तंत्र इसकी जानकारी जुटा पाया। मीरपुर की कुछ महिला और पुरुष आगे आए और उन्होंने इस मामले की जानकारी पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस हरकत में आई। पुलिस, प्रशासनिक और आबकारी विभाग के अधिकारी कर्मचारी मृतकों के परिवार से पूरे मामले की जानकारी हुई। सब कुछ सामने आने के बावजूद पुलिस इस पूरे मामले पर पर्दा डालने में जुटी है।

पांचों के मुंह से निकले झाग और हुईं उल्टियां
पांचों की मौत में एक समानता सामने आई है कि सभी के मुंह से झाग आए और खूब उल्टियां हुईं। अस्पताल में भर्ती कराने के बाद भी इन्हें आराम नहीं मिला। इसके बाद एक के बाद एक पांचों की मौतें हो गई। आदर्श कॉलोनी में शनिवार की रात पांचों ने एक साथ शराब पी और वहीं ठेले पर चिकन खाया था। इसके बाद सभी लोग अपने-अपने घर चले गए थे। देर रात चंद्रपाल के मुंह से झाग निकलने लगा। इसके बाद उल्टियां शुरू हो गईं। परिवार के लोग उन्हें साईं अस्पताल ले गए। लेकिन डॉक्टरों ने चेकअप के बाद उन्हें रेफर कर दिया और भर्ती करने से इन्कार कर दिया।
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इसके बाद परिजन दूसरे अस्पताल ले गए। लेकिन चंद्रपाल की हालत देखने के बाद वहां भी भर्ती नहीं कराया गया। दिल्ली रोड स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन उन्हें आराम नहीं मिला और रविवार को उनकी मौत हो गई। इसी तरह महेश, सुंदरपाल, विक्की और दीपू उर्फ संदीप के मुंह से भी झाग आए। इसके बाद उन्हें उल्टियां हुईं। एक के बाद एक सभी ने दम तोड़ दिया।
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