नई तकनीक एचओजी से चलाई नंदा देवी एक्सप्रेस।
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मुरादाबाद। देहरादून से कोटा जाने वाली नंदा देवी स्पेशल एक्सप्रेस रविवार को पहली बार ऐसी तकनीक से चलाई गई जिससे रोज चालीस हजार रुपये की बचत होगी। यह तकनीक एचओजी (हेड आन जेनरेशन) है, जो बदले परिदृश्य में अहम साबित होने जा रही है। इससे न केवल प्रदूषण पर अंकुश लगाया सकेगा बल्कि हर साल होने वाली अरबों रुपये का डीजल खर्च भी बचाया जा सकेगा। मुरादाबाद रेल मंडल में एचओजी से संचालन वाली यह पहली ट्रेन है।
देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक यातायात सेवा रेलवे दिन प्रतिदिन विकसित हो रही है। एक समय था जब ट्रेनों का परिचालन स्टीम इंजन से होता था। फिर डीजल इंजनों का साथ मिला। इन इंजनों से ध्वनि व वायु प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याएं बढ़ती देख विद्युत चालित ट्रेनों को बढ़ावा दिया गया। अब 85 प्रतिशत ट्रेनें बिजली से चलाई जाती हैं, जिससे प्रदूषण पर तो लगाम लगती ही है, साथ ही खर्चों पर नियंत्रण के साथ ट्रेन को रफ्तार भी ज्यादा मिलती है। बिजली के इंजन से चलने वाली ट्रेनों में एक और तकनीक जोड़ी गई है। रविवार को मुरादाबाद रेल मंडल से नंदा देवी स्पेशल एक्सप्रेस (02402) डीजल की जगह इलेक्ट्रिक इंजन से चली, जिसमें नई एचओजी तकनीक का प्रयोग किया गया। इस तकनीक से इंजन के साथ-साथ बोगियों को भी ओवर हेड लाइन से बिजली मिलेगी। अभी इलेक्ट्रिक इंजन वाली ट्रेनों में बोगियों को लाइट देने के लिए डीजल चालित जेनरेटरों का उपयोग किया जाता है। इससे धुआं रोककर पर्यावरण संरक्षण किया जा सकता है। साथ ही रेलवे को एक दिन में 40 हजार रुपये की बचत होगी। इसके अलावा जेनरेटरों की जगह यात्री डिब्बे लगाए जा सकते हैं। इससे अधिक यात्रियों को कन्फर्म सीट का मौका और रेलवे को ज्यादा यात्री आय का अवसर मिलेगा। फिलहाल मुरादाबाद मंडल से इस तकनीक से एकमात्र ट्रेन चलाई जा रही है। रविवार को इसकी शुरुआत की गई।
यह है एचओजी तकनीक
अभी तक ट्रेनों में एंड आन जेनरेशन तकनीक का प्रयोग होता आया है। इसके तहत जिन ट्रेनों में एसी कोच होते हैं। उनके इंजन को बिजली आपूर्ति ओवर हेड वायर से होती है। इसके अलावा हर कोच की ऊर्जा आवश्यकता को पूरा करने के लिए ट्रेन में आगे और पीछे की ओर एक जेनरेटर कार लगाई जाती है। इसमें बड़ा जेनरेटर होता है जो डीजल से चलता है। वहीं दूसरी ओर एचओजी (हेड आन जेनरेशन) तकनीक के तहत सभी डिब्बों को बिजली ओवर हेड वायर से मिलती है। जिससे डीजल की खपत नहीं होती। एचओजी तकनीक से डिब्बों में एसी चलाने के साथ ही लाइटें, पंखे व अन्य बिजली की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।
मंडल में एचओजी तकनीक से फिलहाल एक ही ट्रेन चलाई जा रही है। महामारी के बाद भविष्य में ट्रेनों के परिचालन में अधिकाधिक इसी तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। रेलवे को डीजल की अपेक्षा बिजली कम खर्च में उपलब्ध हो जाती है। वहीं इस तकनीक से पर्यावरण प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी। - तरुण प्रकाश, मंडल रेल प्रबंधक