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मुरादाबाद: दुष्कर्म में पिता को छठे दिन सजा, ताउम्र रहेगा जेल में

Wed, 29 Jun 2022 12:59 PM IST
मुरादाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
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पुलिस ने आरोपी को भेजा जेल - फोटो : अमर उजाला
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नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के आरोपी को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशेष (पॉक्सो एक्ट प्रथम) अवधेश कुमार की अदालत ने सुनवाई शुरू होने के छठे दिन ही सजा सुनाकर त्वरित न्याय की अनूठी मिसाल पेश की है। अदालत ने दोषी पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए 53 हजार रुपये जुर्माना लगाया है।

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डिडौली कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में रहने वाले 50 वर्षीय ईंट भट्ठा मजदूर के खिलाफ 14 वर्षीय बेटी के साथ दुष्कर्म करने के आरोप की एफआईआर 14 जून को दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने उसी दिन आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मामले की विवेचना डिडौली कोतवाली के एसएसआई सुक्रमपाल सिंह राणा ने की। उन्होंने 22 जून को अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। अगले दिन 23 जून को यह मुकदमा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशेष (पॉक्सो एक्ट प्रथम) अवधेश कुमार सिंह की अदालत में पहुंचा। पहले ही दिन अदालत ने मामले में सुनवाई शुरू कर मुकदमे को ट्रायल पर ले लिया। इस मामले में पीड़िता, उसके भाई, मां, महिला चिकित्सक, एक स्कूल के प्रधानाचार्य, रेडियोलॉजिस्ट, महिला कांस्टेबल ने अदालत के समक्ष अपनी गवाही पेश की।

सोमवार (27 जून) को सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन और आरोपी पक्ष को सुना। अभियोजन पक्ष की तरफ से विशेष लोक अभियोजक (एडीजीसी) बसंत सिंह सैनी ने जोरदार पैरवी की। मंगलवार (28 जून) को भी अदालत ने मुकदमे में सुनवाई की। साक्ष्य व सबूतों के आधार पर आरोपी पिता को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही दोषी पर 53 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अदालत ने जुर्माने की आधी राशि पीड़िता को सौंपने के आदेश दिए हैं। विशेष लोक अभियोजक बसंत सिंह सैनी ने बताया कि इतने कम समय में सजा सुनाए जाने का यूपी का यह पहला मामला है।
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इस मामले में पुलिस को दी गई तहरीर के मुताबिक भट्ठा मजदूर ने परिजनों की अनुपस्थिति में करीब आठ माह पहले 14 वर्षीय बेटी को हवस का शिकार बनाया था। उसके बाद में डरा-धमका कर कई बार मनमानी करता रहा। 11 जून को किशोरी की तबीयत बिगड़ी तो परिजनों ने डॉक्टर की सलाह पर किशोरी का अल्ट्रासाउंड कराया, जिसमें उसके सात माह की गर्भवती होने की जानकारी मिली। मां और भाई के पूछने पर किशोरी ने पीड़ादायक आपबीती बताई, जिसके बाद किशोरी के भाई ने अपने पिता के खिलाफ तहरीर दी।

‘जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो नरमी बरते जाने का कोई औचित्य नहीं’
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशेष (पॉक्सो एक्ट प्रथम) अवधेश कुमार सिंह की अदालत ने दुष्कर्म के मामले में त्वरित न्याय की अनूठी मिसाल पेश करने के साथ दोषी पिता पर कड़ी टिप्पणी की है। अपने फैसले में अदालत ने कहा है कि एक अभिभावक पिता जो परिवार का रक्षक होता है, उसने अपने दायित्व को नकारते हुए न केवल अपनी अबोध बालिका के साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध कई बार जबरन बलात्संग जैसा घृणित कुकृत्य किया है, बल्कि उसे जीवन भर बाप-बेटी के रिश्ते के संबंध में सोचने पर मजबूर कर दिया। पीड़िता गर्भवती है। जब उसका बच्चा पैदा होगा तो हर क्षण हर स्थिति में उसके सामने उसके बाप का क्रूर चेहरा आएगा। वह अत्यधिक पीड़ा के साथ समाज में अपने जीवन को व्यतीत करेगी। इस दशा में जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो उसके खिलाफ नरमी बरते जाने का कोई औचित्य नहीं है।

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