कांठ। क्षेत्र में चीनी मिलें अभी तक नहीं चली हैं। इससे गन्ना उत्पादक किसान अपनी फसल को सस्ते में कोल्हुओं पर बेचने को मजबूर हैं।
छोटे किसानों को दूसरी फसलों की बोआई के लिए खेत खाली करने की जल्दी है। राजीव सिंह ने बताया कि उन्हें गन्ना काटकर सरसों बोनी है। जाकिर हुसैन को भी गेहूं की बोआई के लिए खेत तैयार करने हैं, जिसमें 15 से 20 दिन लगते हैं।
किसान कर्मवीर व राजेश ने बताया कि खाद, मजदूरी, डीजल और दवाइयां महंगी होने से गन्ने की लागत बढ़ गई है। लेकिन गुड़ कोल्हू पर गन्ना केवल 300 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। वीर सिंह, खालिद चंद्रप्रकाश और बाबूराम ने कहा कि यदि चीनी मिलें अक्तूबर के पहले पखवाड़े में चल जातीं तो उन्हें सस्ते में गन्ना नहीं बेचना पड़ता। संवाद