ठाकुरद्वारा। सर्पदंश के मामले में समय से इलाज के स्थान पर झोलाछाप से इलाज एक और जिंदगी पर भारी पड़ गया। 13 सितंबर को घटना होने के बाद परिजन झोलाछाप के शर्तिया इलाज के झांसे में उलझ गए। स्थिति ज्यादा बिगड़ने पर 16 सितंबर को मुरादाबाद के निजी अस्पताल में आए। तब तक बहुत देर हो जाने के कारण निजी चिकित्सकों की कोशिशें भी गांव विजयरामपुर निवासी किसान सुभाष सिंह (56) को नहीं बचा सकीं।
कोतवाली पुलिस ने परिजनों के हवाले से बताया कि सुभाष सिंह 13 सितंबर को अपने खेत में काम करते समय सर्पदंश का शिकार हुए थे। किसी की सलाह पर परिजन उन्हें नजीबाबाद (बिजनौर) में एक झोलाछाप के पास ले गए, जिसने भरोसा दिया कि उसके इलाज से जरूर फायदा होगा। 15 सितंबर आने तक सुभाष सिंह की हालत और बिगड़ गई। इसके बाद घबराए परिजन उन्हें बुधवार (16 सितंबर) मुरादाबाद लाए और एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने सर्पदंश के बाद सही इलाज न होने से स्थिति काफी बिगड़ने की बात बताई। साथ ही उन्हें बचाने के प्रयास शुरू कर दिए लेकिन यह कोशिशें कामयाब नहीं हुई। बृहस्पतिवार तड़के उनकी मौत हो गई। इस सूचना पर पुलिस अस्पताल पहुंची लेकिन परिजनों ने पोस्टमार्टम न कराने की प्रार्थना की। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि बिना पोस्टमार्टम के ही परिजन उनके शव को घर ले गए।