भ्रष्टाचारियों पर अब तक गरजने वाले पीएम मोदी शनिवार को यहां यकायक हताश भी दिखे। उन्हाेंने बार - बार एक ही बात पब्लिक से पूछी- क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ न लड़ूूं ..मेरी क्या गलती है। फिर मायूसी भरे लहजे में कहा - मेरा क्या है.. मैं तो फकीर हूं.. झोला कंधे पर डालकर फिर निकल पड़ूंगा। यह सुनकर कुछ पल के लिए भीड़ में खामोशी छा गई और साथ ही चर्चा भी छिड़ गई कि विपक्ष पर हावी रहने वाले बोल्ड पीएम इतने हताश क्यों हैं? अपने भी ‘फकीर’ बनाने में जुट गए हैं क्या?
कड़े तेवरों के लिए पहचाने जाने वाले पीएम मोदी ने मुरादाबाद की परिवर्तन महारैली में जो बोला वह उनके चिरपरिचित अंदाज से एकदम जुदा था। पीएम ने कहा - मेरे कोई नेताजी नहीं हैं। मेरी हाईकमान तो बस पब्लिक है। बोेले- कुछ लोग मुझे कसूरवार ठहरा रहे हैं। पब्लिक बताए कि मैं सही कर रहा हूं या गलत? मोदी ने यह बात तीन बार दोहराई कि पब्लिक ही मेरी हाईकमान है।
यहां तक तक तो तालियों की गड़गड़ाहट होती रही। लेकिन जैसे ही पीएम आगे बोले - पब्लिक के चेहरे पर अजीब सी बेचैनी उभर आई। पीएम बोले- ये लोग मेरा ज्यादा से ज्यादा क्या बिगाड़ेंगे? मैं तो फकीर हूं झोला कंधे पर डालकर चल दूंगा। इतना सुनते ही एक पल के लिए मोदी - मोदी का शोर थम गया। लेकिन अगले ही पल मोदी के समर्थन में नारे गूंजने लगे। ..आपका कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा मोदी जी।
जनसभा स्थल पर पीएम के भाषण के दौरान ही पब्लिक में सुगबुगाहट शुरू हो गई। पीएम को सुनने पहुंचे डा. निखिल रंजन बोले, आखिर ऐसा क्यों बोला पीएम ने? कहीं नोटबंदी को लेकर घर के भीतर भी तो पीएम खुद को घिरा महसूस नहीं कर रहे। तल्लीनता से पीएम का भाषण सुन रहे शिक्षक नरेंद्र के मुंह से भी निकल पड़ा- आखिर कौन है जो पीएम को ‘फकीर’ बनाना चाहता है। वीआईपी गैलरी में बैठी निधि मित्तल बोलीं- विपक्ष से तो पीएम हताश होने से रहे, पीएम की इस टीस के पीछे जरूर कुछ अपने ही होंगे।
स्कूल से छुट्टी लेकर पीएम का भाषण सुनने पहुंचे शिक्षक आलोक और विकास बोले- नोटबंदी से देशभर के भ्रष्ट नेता और बेईमान अफसर परेशान हैं। इन दोनों का कहना था पीएम की हताशा से साफ झलकता है कि जरूर घर (पार्टी) के भीतर भी पीएम पर कुछ लोग दबाव डालने की कोशिश में होंगे।
हालांकि सवाल यह भी है कि यह मोदी के मन की पीड़ा थी या इमोशनल ड्रामेबाजी, हालांकि पब्लिक में संदेश देने में वे जरूर सफल दिखाई दिए।