मुरादाबाद। आरबीआई ने निर्यातकों के लिए विदेशी भुगतान प्राप्त करने की समय सीमा 15 माह से घटाकर नौ माह कर दी है। नए नियम के तहत अब निर्यातकों को निर्यात के एवज में मिलने वाली विदेशी मुद्रा अधिकतम नौ माह के भीतर भारत में लानी होगी। निर्यातकों का कहना है कि इस बदलाव से वित्तीय अनुशासन बढ़ेगा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा भी तेज होगी।
पीतलनगरी का हस्तशिल्प उद्योग मुख्य रूप से अमेरिका व यूरोप के खरीदारों पर निर्भर है। यहां बड़ी संख्या में निर्यात ऐसे अनुबंधों के तहत होते हैं, जिनमें भुगतान की अवधि अपेक्षाकृत लंबी रहती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद निर्यातकों को खरीदारों के साथ भुगतान की शर्तों की फिर से समीक्षा करनी होगी। समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए नई वित्तीय रणनीति बनानी पड़ेगी।
यस के चेयरमैन व निर्यातक जेपी सिंह ने कहा कि नए नियम से लंबित भुगतान के मामलों में कमी आने की संभावना है। शुरुआती दौर में कुछ चुनौतियां सामने आ सकती हैं, क्योंकि कई विदेशी खरीदार लंबी क्रेडिट अवधि पर काम करते हैं। उन्होंने कहा कि भुगतान जल्दी मिलने से निर्यातकों की कार्यशील पूंजी पर दबाव कम होगा। बैंक ऋण पर निर्भरता घटने के साथ ब्याज लागत में भी कमी आ सकती है। इससे उद्योगों को उत्पाद विकास, नई डिजाइनिंग और उत्पादन विस्तार के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे।