मुरादाबाद। महिलाओं में बढ़ता मोटापा अब स्त्री रोग विशेषज्ञों के लिए बड़ी चिंता बन गया है। जिला महिला अस्पताल और निजी अस्पतालों की स्त्री रोग ओपीडी में आने वाली लगभग हर दूसरी महिला सामान्य वजन से अधिक पाई जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि मोटापा केवल शरीर का वजन बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पीसीओएस, अनियमित माहवारी, बांझपन, गर्भावस्था की जटिलताओं और गर्भकालीन शुगर जैसी गंभीर समस्याओं का प्रमुख कारण बन रहा है। इसलिए ऐसी महिलाओं को दवा शुरू करने से पहले वजन नियंत्रित करने की सलाह दी जा रही है।
जिला महिला अस्पताल में प्रतिदिन 120 से 150 महिलाएं स्त्री रोग विशेषज्ञों को दिखाने पहुंचती हैं। अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार पिछले छह माह में 18 हजार से अधिक महिलाओं ने ओपीडी में परामर्श लिया। डॉक्टरों का कहना है कि इनमें करीब नौ हजार महिलाओं का वजन उनकी लंबाई के अनुसार सामान्य से अधिक था। वहीं शहर के निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में भी इसी अवधि में करीब 18 से 20 हजार महिलाओं ने स्त्री रोग विशेषज्ञों से परामर्श लिया, जिनमें बड़ी संख्या ओवरवेट महिलाओं की रही। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार अधिक वजन और मोटापा हार्मोन असंतुलन, टाइप-2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप और प्रजनन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ाते हैं। महिलाओं में इसका सबसे अधिक असर पीसीओएस और गर्भधारण क्षमता पर पड़ता है।
महिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुजाता और डॉ. विमिता अग्रवाल का कहना है कि ओपीडी में बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं पहुंच रही हैं, जिन्हें अनियमित माहवारी, पीसीओएस, थायरॉयड, गर्भधारण में देरी, गर्भकालीन हाई ब्लड प्रेशर और शुगर की समस्या है। अधिकांश मामलों में जीवनशैली में बदलाव और वजन नियंत्रित करने से अच्छे परिणाम मिलते हैं।
मोटापा साथ लाता है यह बीमारियां
आईएमए की सचिव रहीं डॉ. सुदीप कौर का कहना है कि पीसीओएस प्रजनन आयु की महिलाओं में सबसे आम हार्मोन संबंधी बीमारी है और मोटापा इसके लक्षणों को और गंभीर बना सकता है। इससे अंडोत्सर्जन प्रभावित होता है और गर्भधारण में कठिनाई बढ़ सकती है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीषा जैन का कहना है कि कई महिलाएं दवा से तुरंत राहत चाहती हैं, जबकि उनकी आधी समस्या वजन कम करने से ही नियंत्रित हो सकती है। यदि शरीर का वजन पांच से दस प्रतिशत भी कम हो जाए तो पीसीओएस, अनियमित माहवारी और गर्भधारण की संभावना में सुधार देखा जाता है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपाली वर्मा का कहना है कि अधिक वजन वाली गर्भवती महिलाओं में हाई ब्लड प्रेशर, गर्भकालीन शुगर, समय से पहले प्रसव और ऑपरेशन से डिलीवरी का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए गर्भधारण की योजना बनाने से पहले वजन नियंत्रित करना जरूरी है।
डॉक्टरों के कोट्स
हमारी ओपीडी में आने वाली करीब 50 प्रतिशत महिलाएं ओवरवेट होती हैं। इनमें बड़ी संख्या पीसीओएस, अनियमित माहवारी और गर्भधारण में परेशानी की शिकायत लेकर आती है। 29 वर्षीय एक महिला का केवल वजन नियंत्रित होने के बाद अंडोत्सर्जन सामान्य हुआ और इलाज का बेहतर परिणाम मिला।
- डॉ. सुदीप कौर
ओपीडी में आने वाली लगभग हर दूसरी महिला का वजन सामान्य से अधिक होता है। हाल ही में 26 वर्षीय युवती अनियमित माहवारी और हार्मोन असंतुलन की शिकायत लेकर आई थी। दवा के साथ वजन घटाने, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से कुछ ही महीनों में उसकी स्थिति में काफी सुधार हुआ।
- डॉ. मनीषा जैन