सेहत महकमा जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के तमाम दावेे करता है, लेकिन हकीकत ये है कि जिले में स्टिल बर्थ के केस बढ़ रहे हैं। हर महीने जिले में औसतन तीस मांओं की कोख उजड़ रही है। प्रसव के दौरान गर्भ में हर महीने तीस नवजातों की मौत हो रही हैै।
जनवरी से अब तक 270 नवजात दम तोड़ चुके हैं। ये आंकड़े सरकारी अस्पतालों के हैं। जबकि पिछले साल ये संख्या 180 के करीब थी। मातृ और शिशु मृत्युदर पर लगाम लगाने के लिए जननी सुरक्षा योजना, मातृ एवं शिशु सुरक्षा सहित अन्य योजनाएं चल रही है। हर योजना का मकसद जच्चा-बच्चा की सुरक्षा हैै।
बावजूद इसके मातृ एवं शिशु मृत्युदर में जितनी कमी चाहिए उतनी कमी नहीं आ रही है। पिछले साल की तुलना में इस साल स्टिल बर्थ के मामले बढ़े हैं। जिले में औसतन हर माह तीस नवजात दुनिया में कदम रखने से पहले की दम तोड़ दे रहे हैं।
सरकारी अस्पतालों में आठ महीनों में प्रसव के दौरान गर्भ में करीब 270 नवजातों की मौत हो चुकी हैै। इसके पीछे कारण चाहे जो भी हो, लेकिन इतनी योजनाओं के संचालन के बाद भी नवजातों की मौत स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करते हैं।